अंक ज्योतिष में रंगों का महत्व


हम सब जानते हैं कि एक संगीतकार अपने-अपने भावों को प्रकट करने के लिए, शब्दों का सहारा नहीं लेता, और फिर भी अपनी भावनाओं को संप्रेषित करने में सफल होता है। ठीक उसी तरह कवि को अपनी भावनाओं की अभिव्यक्ति के लिए अपनी कविता के लिए संगीत की आवश्यकता नहीं होती। दोनों ही स्थितियों में हम यह अनुभव करते हैं कि यह भाव आपके अपने ही हैं।
जीवन की अनुभूतियों के विषय में हम यह पाते हैं कि संगीत और शब्द की भाषा मानय महत्व रखती है। लेकिन फिर भी हम महसूस करते है कि शब्दों में जो अभिव्यक्त करने की क्षमता है वो संगीत में नहीं। संगीत के सुरों का पैमाना ब्रह्माण्डीय कारकों में सीधा संबंध रखता है और हम यह भी जानते है कि ग्रह रंगों व अंकों से संबंधित है, इसलिए ब्रह्माण्डीय क्रम के माध्यम की सुसंगति प्रकट होती है, जो ध्वनि, रंग और अंकों में पाई जाती है।
ग्रह-
रंग हमारी ज्ञानेंद्रियों द्वारा ग्रहण किए गये, आकाशीय कमानों की दर को प्रकट करते है। जैसे:- शनि ग्रह को ज्योतिष में विषाद ग्रह माना गया है। इसका शुभ परिणाम तभी होता है अगर यह जन्म कुण्डली में विशेष रूप से बलवान हो। नेपोलियन को भाग्य द्वारा प्रभावित व्यक्ति माना गया है। आमतौर पर दार्शिनिकों की कुण्डली में प्रभावकारी तरीके में विद्यमान होता है और जब यह मस्तिष्क पर विराजता है तो गहन और गंभीर विचारों को व्यक्त करवाता है। इसलिए जबुंकी नील रंग का सम्बन्ध विषाद से है। इसका मुख्य तत्व है- सतत् प्रयत्नशीलता। इसके ठीक उल्टे रंग है। नारंगी व गहरा पीला, जो शक्तिपूर्ण क्रियात्मक रंग है।
बृहस्पति आशावादी ग्रह है, जो विस्तार व आशा का प्रतीक है तथा बैंगनी रंग में सम्बन्ध रखता है। यह रंग श्वेत प्रकाश की चांदी की महीन पर्त से निकलने से बनता है। तथा मनुष्य के आभा मण्डल से उसी प्रकार जुड़ा हुआ है, जैसे हरा रंग मनुष्य के तारकीय पदार्थ से। भारतीय नक्षत्र विज्ञान के अनुसार ब्रह्मा (बृह धातु, जिसका अर्थ विस्तार है) में ब्रह्माण्डीय अथवा यह ब्रह्माण्डीय पिंड शक्ति शामिल है, जहां वह स्वयं अपना विस्तार करते हुए ब्रह्मांड की सृष्टि करते हैं।
गूढ़ विज्ञान में यह अविनाशी तथा विकासमान पिंड का वाहक होता है। इस प्रकार, हम ब्रह्मा व बृहस्पति में एक संबंध खोज सकते हैं। बृहस्पति को देव-पितर अर्थात देवपिता भी कहते हैं। इसी प्रकार का संबंध बृहस्पति व आभामंडल अथवा व्यक्ति पिंड में भी दिखाई देता है।
बृहस्पति ग्रह, जो विस्तार का स्वामी है, बैंगनी रंग के समकक्ष है। यह रंग शक्तिपूर्ण आशावाद का प्रतीक है। यदि जन्मकुंडली में प्रभावशाली बृहस्पति पड़ा है, तो ऐसा व्यक्ति स्वभाव से ही विस्तारवादी व आशावान होता है। 3 की संख्या बृहस्पति तथा बैंगनी रंग से संबंधित है।
मंगल दमकता हुआ लाल ग्रह है। यह संगीत के तीव्र सुर G से संयुक्त है व लाल रंग तथा अंक 9 के समकक्ष है। मंगल ग्रह संघर्ष, चोट, घाव, मृत्यु, हत्या, प्यार, सैनिक आदि से संबंधित है। इसके कई रूपों में पैनी वस्तुएं, तलवार, भाला, छुरा व लपलपाती जिह्रा आदि शामिल हैं। अंक 9 पुनर्निर्माण, अध्यात्म, स्वतंत्रता, स्व-विस्तार व परिव्याप्तता का प्रतीक है। मंगल विष्णु से संबंधित है तथा विष्णु इस सृजित ब्रह्मांड को चलाने वाले प्रभु है। ‘विष्’ अर्थात व्याप्त होना। अग्नि, गहनता, उत्साह, तीक्ष्णता आदि मंगल ग्रह के गुण है।
इस ग्रह से संबंधित से सभी गुण, रंग तथा ध्वनियां हमारे लिए इसलिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि ये हमारी भावनाओं को चेतना के माध्यम से प्रभावित करती है।
जब हम संगीत सुनते हैं, तो उससे आलोड़ित होने वाली भावनाओं के प्रति चैतन्य रहते हैं और हमें जो अनुभूति होती है, उसका श्रेय हम संगीतकार को देते हैं। सच तो यह है कि संगीत स्वयं में कुछ नहीं है। जो कुछ है वह उनल यबद्ध कंपनों की श्रृंखला में है, जिससे संगीत का निर्माण होता है और वह वास्तव में पूर्णत: शोररहित पर्यावरणीय गतियां हैं, जो तभी ध्वनि की महत्ता प्राप्त करती हैं, जब वे हमारी चेतना को सीमा में प्रवेश करती हैं।
शुक्र ग्रह को संगीत, कला, काव्य तथा मानव मन की कोमल भावनाओं का प्रतीक माना जाता है। यह समन्वय तथा तालमय कलाओं को अपने में समेटे हुए है। नृत्य, संगीत, काव्य, चित्रकला तथा उद्योग जिनमें कलात्मकता होती है, शुक्र के गुण विद्यमान होते हैं। इसका नीला रंग औषधि की भांति कार्य करता है। शांतिदायक, मृदु व प्रसन्नतादायक नीला रंग स्नायविक विश्राम का प्रतीक है। रंगों के माध्यम से चिकित्सा करने वाले चिकित्सक बहुधा इसका प्रयोग करते हैं। यह संगीत के सुर की प्रतिध्वनि है तथा सभी संगीत वाद्यों में इसका प्रयोग लयबद्धता के लिए किया जाता है।
बुध ग्रह पीले रंग से संबंध रखता है तथा स्पैक्ट्रम में सबसे प्रकाशवान रंग है। बुध मस्तिष्क की तार्किकता व ग्रहणशीलता का प्रतीक है। प्रकाश के द्वारा ही हम विभिन्न वस्तुओं के रूप, आकार को देख पाते हैं और बुध सबसे अधिक प्रकाशवान ग्रह हैं, इसीलिए सभी को जाग्रत करने वाला है।
पीला रंग नीले (शुक्र) के साथ मिलकर प्राकृतिक हरा रंग बनाता है। इसलिए हर्मिस (Hermes) और एफ्रोडाइट (Aphrodite) मिलकर अर्थात बुध व शुक्र मिलकर एक प्राकृति मनुष्य का निर्माण करते हैं।
इस प्रकार अंक 6 शुक्र व अंक 5 बुध मिलकर अंक 11-2 बनाते हैं, जो चंद्र की संख्या है तथा यह हमारी तालिका में हरे रंग से संबंधित है। जब (जो बुद्धि सिद्धांत का प्रतीक है) अपने आकाशीय विपरीत से मिलता है, तो परिणामत: ज्ञान-प्रकाश की उत्पत्ति होती है। ज्ञेयवादियों ने मस्तिष्क के दो रूपों की व्याख्या की है तथा क्रिस्टॉस अर्थात बुध के पिंड के ऊपर उन्होंने इरोज के पिंड को रखा है। बुध को सर्पदंड, जिसे हर्मिस देव का बेंत कहते हैं, के रूप में भी जाना जाता है।
बुध इड़ा व पिंगला नाड़ियों के पारस्परिक मेल का भी प्रतीक हैं। इड़ा व पिंगला इड़ा व पिंगला नाड़ियों के पारस्परिक मेल का भी प्रतीक है। इड़ा व पिंगला सृजनात्मक अग्नि हैं, जो सुषुम्ना में एकीकृत हो जाती हैं। ब्रह्मदंड या रीढ़ की हड्डी, जो योगी की बेंत द्वारा प्रकट की जाती हैं तथा इस बेंत के लघु कटाव व गांठें रीढ़ की हड्डी में होने वाली स्नायविक क्रियाओं का प्रतीक हैं। यह हर्मिक कला या गुप्त ज्ञान का प्रतीक है।
मस्तिष्क की क्रियाओं द्वारा हमारी भावनाएं विचारों में तथा विचार भावनाओं में परिवर्तित होते हैं। इसलिए बुद्धि सिद्धांत द्वारा ही संख्या, जो बुध द्वारा बताई जाती है, भावनाओं से सीधा संबंध रखती है। बुध की संख्या 5 हे तथा यह प्रकृतिमय संख्या मानव जाति के विशिष्ट गुणों का संकेत देती है। चंद्र दो संख्याओं से संबंधित है-7 जो सकारात्मक भाव में है तथा 2जो नकारात्मक भाव में है। संख्या 7 के रूप में यह पूर्ण चंद्र सूर्य के विपरीत क्रियाशीलत है। जब हम जब हम संख्या 1 व 7 का योग करते हैं तो संख्या 8 अशुभ संकेत करती है। नवचंद्र की दशा में संख्या 2 सूर्य संख्या 1 के योग से संख्या 3 बनाती है, जो सौभाग्यशाली संख्या है तथा वर्धनशील भी है, जबकि संख्या 8 हानि की, कमतरी की घोतक है।
संख्या 3 बृहस्पति की संख्या है तथा विस्तार का संकेत देती है तथा संख्या 8 शनि की संख्या है, जो संकुचन का संकेत देती है। सूर्य की युति में चंद्र नकारात्मक या स्त्रीपर्यक होता है, परंतु सूर्य से सातवें घर में होने पर यह सकारात्मक व पुरुष गुणवाला साबित होता है।
चंद्र की संख्या 2 सापेक्षता, हिचकिचाहट, भूलना, परिवर्तन का संकेत देती है, परंतु संख्या 7 पूर्णता व स्थिरता की प्रतीक होती है। हिब्रू प्रणाली में सप्ताह के दिनों के बा संख्यांक आते है, जैसे
रविवार          1-8,  सोमवार    2-9,  मंगलवार    3,    बुधवार           4,
बृहस्पतिवार 5,    शुक्रवार          6 और शनिवार    7

संख्याएं 1 व 8 जीवन व मृत्यु सूर्य के प्रभाव में निहित हैं, जबकि संख्या 2 व 9, जो परिवर्तन व शक्ति की प्रतीक हैं, चंद्र के प्रभाव में आती हैं।
चंद्र हमेशा से पृथ्वी के साथ ही पहचाना जाता रहा है तथा सांकेतिक प्रणालियों में इसका संबंध भौतिक मनुष्य से है। इसे शुक्र ग्रह व मंगल के मध्य रखा जाता है। इसका रंग हरा है, जो नीले व पीले रंग से मिलकर बनता है। (शुक्र व बुध के रंग) इन्हीं दो ग्रहों की संख्याओं 6 व 5 के योग 11-2 अर्थात चंद्र (नकारात्मक) संख्या बनाता है। अब चूंकि हरा रंग धरती पर विद्यमान बनस्पतियों से मिलता है, इसलिए यह प्राकृतिक रंग है तथा स्पेक्ट्रम में नीले व पीले रंगों के मध्य होता है।
अब यदि हम नीले रंगों को विचार का तथा पीले रंगों को भावनाओं का प्रतीक मान लें, तब हमें सम्मिश्रित हरे रंग में प्राकृतिक मनुष्य की आत्माएं मनुष्य की आत्माएं धरती पर चंद्र पिंड से आती हैं। गूढ़ ज्ञानवादी इसे चंद्र का संबंध नहीं मानते, बल्कि एक ऐसे आकाशीय धरातल के परिधिजनक प्रभाव को मानते हैं, जो गुरुत्वाकर्षण के नियमों के अनुसार, धरती के बाहर व चारों ओर चंद्र कक्षा तक विद्यमान हैं।
वह प्रणाली, जो रंगों व संख्याओं के विचारात्मक व भावनात्मक संबंधों की ओर संकेत करती है, संक्षेप में निम्नलिखित रूप से दिखाई जा सकती है।
बृहस्पति    बैंगनी      3    आशा, महत्वाकांक्षी, विस्तार
शनि       जंबुकी नील 8    चिंतन, दर्शन
शुक्र        नीला       6    शुचिता, अध्यात्मक, शांति
चंद्र        हरा        2    संवेदना, परिवर्तनशीलता
बुध        पीला       5    मस्तिष्क, बुद्धि, अनुभूति
सूर्य        नारंगी      4    शक्ति, बल
मंगल      लाल       9    उत्साह, ऊर्जा, आवेग
सूर्य का रंग नारंगी शक्ति के संघनित होने की स्थिति में मंगल के लाल रंग में बदल जाता है। संयुक्तता के सिद्धांत के अनुसार हमें संख्या को विचारों से तथा भावनाओं को रंगों से संबंधित मानना चाहिए। परिणामत: संख्या विज्ञान तथा रंग कला से संबंध रखता है, जिसके द्वारा पहले अवयव में बौद्धिक क्षमता तथा दूसरे में कलात्मक अभिरुचियों का प्रदर्शन देखा जा सकता है।
अपने अन्वेषण को रंगों में रखते हुए हमें ध्वनि की आरंभिक संयुक्तता निम्नलिखित रूप में दिखाई दे सकती है।
सुर C,E,G एक उभयनिष्ठ आरोह-अवरोह का निर्माण करते हैं। उनसे संबंधित संख्याएं हैं-4,5 तथा 9, इस प्रकार 9 में 4+5 समाहित हैं।
सुर D,F तथा A एक विशेष आरोह-अवरोह का निर्माण करते हैं तथा उनसे संबंधित संख्याएं 8,7 तथा 6 हैं।
इस प्रकार, वे 8+7-15-6 का योग लाते हैं, जो संख्या 6 से सुसंगति रखता है। मैं यह नहीं कह सकता कि यह प्रयोग कहां तक आगे बढ़ाया जा सकता है।

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