रोगों के भी होते है अंक


अंक ज्ञान से हर तरह के मामले की भविष्वाणी की जा सकती है, लेकिन इसका गहरा संबंध स्वास्थ्य से भी है। शरीर के विभिन्न महत्वपूर्ण हिस्सों के सही माप के साथ-साथ उन अंकों की जानकारी होना भी जरूरी है,जो स्वस्थ रहने में मुख्य भूमिका निभाते हैं। इस अंक को उसके उसी स्तर तक बनाए रखना क्यों जरूरी है।
कोलेस्ट्रॉल नंबर 5:
देखा जाए,तो शरीर में कुल कोलेस्ट्रॉल का स्तर 5 एमएमओएल/एल से अधिक नहीं होना चाहिए। एमएमओएल/एल स्वास्थ्य को मापने की इकाई है। यदि किसी को दिल की बीमारियां होने का खतरा अधिक है,तो ज्यादा से ज्यादा 5 नंबर सुरक्षित माना जाता है। भारतीयों में यह स्तर औसतन 5.7 से 6.0 होता है, जो कि अधिक माना जाता है। जब शरीर में कोलेस्ट्रॉल बहुत अधिक बढ जाता है। तो यह धमकियों की दीवारों में जमा हो जाता है। इससे दिल का दौरा का खतरा बढ जाता है।
कमर 32: 
यदि कमर का साइज 32 इंच से अधिक होने पर ऐसा  समझा जाता है कि कमर पर चरबी  चढ़ गयी है। यह  उस हिस्से के अंगों जैसे लिवर के लिए अच्छा नहीं समझा जाता। इस तरह के अंगों पर चरबी चढ़ने से उनकी कार्यक्षमता प्रभावित होती है और इनमें से  निकलने वाले रसायन  शरीर के इंसुलिन सिस्टम को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे टाइप 2 डाइबिटीज होने को खतरा बढ़ सकता है।
 हड्डियों का घनत्व 0-1.5: 
यदि हड्डियों का घनत्व 0 से-1.5 के बीच है, तो यह सामान्य है। अगर यह -1.5 से -2.1 के बीच है, तो इसका अर्थ है कि ऑस्टियोपीनिया है। यानि कि हड्डियों का घनत्व औसत से कम होने पर जीवनशैली में सुधार लाने की जरूरत होती है। इससे हड्डिया ऑस्टियोपोरोसिस की शिकार होती है। ऑस्टियोपोरिसिस से फरैक्चर होने का खतरा बढ सकता है
दिल की धडकन (62-85)का होनाः
दिल की धड़कन भी आपके स्वास्थ्य का हाल बताती है। आराम करते समय दिल की धड़कन के 90 बीपीएम ,बीट्स/मिनट से अधिक होने से हार्ट अटैक का खतरा बढ सकता है, लेकिन 62से 85 के बीच के अंक को सामान्य समझा जाता है। ब्लड पे्रशर,कोलेस्ट्रॉल का स्तर, वजन और फिटनेस आदि सभी इसके महत्वपूर्ण कारण माने जाते हैं।
ब्लड शुगर का अंक-6.1:
यदि फास्टिंग में ब्लड-ग्लूकोज ,शुगर का स्तर 109 एमजी यानी 6.1 एमएमओएल/एल से अधिक चला जाता है, तो यह इस बात का संकेत है कि आपका शरीर ग्लूकोज़ को ऊर्जा में परिवर्तित नहीं कर रहा है, जैसा कि इसे करना चाहिए।  यह इस बात का सूचक है कि डाइबिटीज होने का खतरा बढ़ गया है,जो कि 125 एमजी यानी 7 एमएमओएलध्एल के बीच है, तो इसे आईजीटी या इंपेयर्ड ग्लूकोज टोलरेंस कहते हैं। जिसका अर्थ है कि दिल की बीमारी और स्ट्रोक का खतरा थोड़ा ज्यादा बढ़ गया है।
ब्लड प्रेशर का अंक 140/85:  
ब्लड प्रेशर 140/85 से अधिक नहीं होना चाहिए। अगर इसकी की रीडिंग इससे कम आए, तो दिल की बीमारियां व स्ट्रोक होने का खतरा कम होता है। यदि किसी को हार्ट अटैक, स्ट्रोक या दिल की बीमारी या डाइबिटीज है, तो इससे गुरदे की बीमारी, डिमेंशियां और आंखों की समस्याएं हो सकती हैं.

आपके घर का नंबर आपका भाग्य बदल सकता है


एक से लेकर नौ तक के अंकों के संबंध व्यक्ति के हर पहलू के साथ जुड़े हुए हैं।  मकान का नंबर तो सामान्य बात है। व्यक्ति जिस भी महानगर, शहर या गांव-कस्बे और मुहल्ले या कालोनियों में रहता है उसके नामाक्षरों से बने मूल अंक के तालमेल के आधार पर शुभ-अशुभ का आंकलन किया जा सकता है। यानि कि निवास करने वाले स्थान या शहर का मूल अंक व्यक्ति के जन्म अंक के अनुकूल हाने की स्थिति में वह स्थान उसके लिए संभावनाओं से भरा होता है। यदि व्यक्ति के नाम का अंक के साथ अंक शास्त्र के अनुसार मेल खाने वाला होता है तो वह स्थान उसके लिए और भी शुभ और भाग्यशाली माना जाता है।
इसी तरह से भागमभाग दौर को सुविधाजनक और आसान बनाने के लिये  जीवन का अभिन्न अंग बन चुके वाहन के नंबर के साथ भी है। इस बारे में विस्तार से जानने से पहले आईए जानते हैं कि आपके जन्म अंक के  मुताबिक किस नामांक वाले स्थान का प्रभाव कैसा हो सकता है।
निवास और अंक-  
अंक 1 वाले व्यक्ति के लिए इसी अंक वाले शहर, मुहल्ले या कॉलोनी में रहना चाहिए जिसका नामांक एक हो। हालांकि अंक विद्या के अनुसार 1 और 4 तथा 2 और 7 वाले व्यक्ति वैसे किसी नाम वालों को सभी तरह के स्थान उपयुक्त होते हैं। इसके अनुसार 1, 2, 4 या 7 वाले वैसे किसी भी स्थान पर शुभ मानकर रह सकते हैं, जिनके नामांक वही नंबर यानि 1, 2, 4 या बनते हों।
इसी प्रकार से 3, 4, 5, 6, 7, 8 और 9 अंक वाले व्यक्तियों को उन्हीं शहरों में रहना चाहिए जो उनके अंक के अनुकूल बनते हों। हालांकि अंक पांच वाले व्यक्ति किसी भी नामांक वाले शहर में रह सकते हैं। यह अंक सभी स्थानों के नामांकों को अपने अनुकूल बना लेता है।
अंक 4 और 8 वालों को यदि उनके अनुकूल नामांक के स्थान नहीं मिलता हो तो वे इससे पड़ने वाले दुष्प्रभाव को अपने नाम के अक्षर बदल कर 1, 3, 5 या 6 श्रृंखला वाले अंक का बनाने से वह स्थान भाग्यशाली हो सकता है।
अंक 3, 6 और 9 ऐसे अंक हैं, जिन्हें जिधर से भी जोड़ा जाए अंतिम अंक 9 बनते हैं। इसलिए स्पष्ट है कि इन अंकों वाले व्यक्ति एक-दूसरे के अनुकूल होते हैं। उसी तरह से इस अंक वाले इन्हीं नामांक वाले शहर और स्थान खुद सहज और श्रेष्ठ बनाने में सफल होते हैं। इसके बावजूद मकान, स्थान या शहर की अनुकूलता व्यापक रूप से देखनी चाहिए। उनमें सबसे निकट और बार-बार हर महत्वपूर्ण जगह के इस्तेमाल आने वालों में मकान या फ्लैट का नंबर होता है। इस नंबर के अनुसार मकान के स्वरूप और उससे मिलने वाली सकारात्मक या नकारात्मक ऊर्जा का भी पता चलता है। मकान का नंबर अगर एक से अधिक बनी संख्या हो तो उसके सभी अंकों को जोड़कर एक अंक की प्राप्ति होती है।

निवास और अंक

एक से लेकर नौ तक के अंकों के संबंध व्यक्ति के हर पहलू के साथ जुड़े हुए हैं।  मकान का नंबर तो सामान्य बात है। व्यक्ति जिस भी महानगर, शहर या गांव-कस्बे और मुहल्ले या कालोनियों में रहता है उसके नामाक्षरों से बने मूल अंक के तालमेल के आधार पर शुभ-अशुभ का आंकलन किया जा सकता है। यानि कि निवास करने वाले स्थान या शहर का मूल अंक व्यक्ति के जन्म अंक के अनुकूल हाने की स्थिति में वह स्थान उसके लिए संभावनाओं से भरा होता है। यदि व्यक्ति के नाम का अंक के साथ अंक शास्त्र के अनुसार मेल खाने वाला होता है तो वह स्थान उसके लिए और भी शुभ और भाग्यशाली माना जाता है।
इसी तरह से भागमभाग दौर को सुविधाजनक और आसान बनाने के लिये  जीवन का अभिन्न अंग बन चुके वाहन के नंबर के साथ भी है। इस बारे में विस्तार से जानने से पहले आईए जानते हैं कि आपके जन्म अंक के  मुताबिक किस नामांक वाले स्थान का प्रभाव कैसा हो सकता है।
निवास और अंक-  
अंक 1 वाले व्यक्ति के लिए इसी अंक वाले शहर, मुहल्ले या कॉलोनी में रहना चाहिए जिसका नामांक एक हो। हालांकि अंक विद्या के अनुसार 1 और 4 तथा 2 और 7 वाले व्यक्ति वैसे किसी नाम वालों को सभी तरह के स्थान उपयुक्त होते हैं। इसके अनुसार 1, 2, 4 या 7 वाले वैसे किसी भी स्थान पर शुभ मानकर रह सकते हैं, जिनके नामांक वही नंबर यानि 1, 2, 4 या बनते हों।
इसी प्रकार से 3, 4, 5, 6, 7, 8 और 9 अंक वाले व्यक्तियों को उन्हीं शहरों में रहना चाहिए जो उनके अंक के अनुकूल बनते हों। हालांकि अंक पांच वाले व्यक्ति किसी भी नामांक वाले शहर में रह सकते हैं। यह अंक सभी स्थानों के नामांकों को अपने अनुकूल बना लेता है।
अंक 4 और 8 वालों को यदि उनके अनुकूल नामांक के स्थान नहीं मिलता हो तो वे इससे पड़ने वाले दुष्प्रभाव को अपने नाम के अक्षर बदल कर 1, 3, 5 या 6 श्रृंखला वाले अंक का बनाने से वह स्थान भाग्यशाली हो सकता है।
अंक 3, 6 और 9 ऐसे अंक हैं, जिन्हें जिधर से भी जोड़ा जाए अंतिम अंक 9 बनते हैं। इसलिए स्पष्ट है कि इन अंकों वाले व्यक्ति एक-दूसरे के अनुकूल होते हैं। उसी तरह से इस अंक वाले इन्हीं नामांक वाले शहर और स्थान खुद सहज और श्रेष्ठ बनाने में सफल होते हैं। इसके बावजूद मकान, स्थान या शहर की अनुकूलता व्यापक रूप से देखनी चाहिए। उनमें सबसे निकट और बार-बार हर महत्वपूर्ण जगह के इस्तेमाल आने वालों में मकान या फ्लैट का नंबर होता है। इस नंबर के अनुसार मकान के स्वरूप और उससे मिलने वाली सकारात्मक या नकारात्मक ऊर्जा का भी पता चलता है। मकान का नंबर अगर एक से अधिक बनी संख्या हो तो उसके सभी अंकों को जोड़कर एक अंक की प्राप्ति होती है।

अंक ज्योतिष में रंगों का महत्व


हम सब जानते हैं कि एक संगीतकार अपने-अपने भावों को प्रकट करने के लिए, शब्दों का सहारा नहीं लेता, और फिर भी अपनी भावनाओं को संप्रेषित करने में सफल होता है। ठीक उसी तरह कवि को अपनी भावनाओं की अभिव्यक्ति के लिए अपनी कविता के लिए संगीत की आवश्यकता नहीं होती। दोनों ही स्थितियों में हम यह अनुभव करते हैं कि यह भाव आपके अपने ही हैं।
जीवन की अनुभूतियों के विषय में हम यह पाते हैं कि संगीत और शब्द की भाषा मानय महत्व रखती है। लेकिन फिर भी हम महसूस करते है कि शब्दों में जो अभिव्यक्त करने की क्षमता है वो संगीत में नहीं। संगीत के सुरों का पैमाना ब्रह्माण्डीय कारकों में सीधा संबंध रखता है और हम यह भी जानते है कि ग्रह रंगों व अंकों से संबंधित है, इसलिए ब्रह्माण्डीय क्रम के माध्यम की सुसंगति प्रकट होती है, जो ध्वनि, रंग और अंकों में पाई जाती है।
ग्रह-
रंग हमारी ज्ञानेंद्रियों द्वारा ग्रहण किए गये, आकाशीय कमानों की दर को प्रकट करते है। जैसे:- शनि ग्रह को ज्योतिष में विषाद ग्रह माना गया है। इसका शुभ परिणाम तभी होता है अगर यह जन्म कुण्डली में विशेष रूप से बलवान हो। नेपोलियन को भाग्य द्वारा प्रभावित व्यक्ति माना गया है। आमतौर पर दार्शिनिकों की कुण्डली में प्रभावकारी तरीके में विद्यमान होता है और जब यह मस्तिष्क पर विराजता है तो गहन और गंभीर विचारों को व्यक्त करवाता है। इसलिए जबुंकी नील रंग का सम्बन्ध विषाद से है। इसका मुख्य तत्व है- सतत् प्रयत्नशीलता। इसके ठीक उल्टे रंग है। नारंगी व गहरा पीला, जो शक्तिपूर्ण क्रियात्मक रंग है।
बृहस्पति आशावादी ग्रह है, जो विस्तार व आशा का प्रतीक है तथा बैंगनी रंग में सम्बन्ध रखता है। यह रंग श्वेत प्रकाश की चांदी की महीन पर्त से निकलने से बनता है। तथा मनुष्य के आभा मण्डल से उसी प्रकार जुड़ा हुआ है, जैसे हरा रंग मनुष्य के तारकीय पदार्थ से। भारतीय नक्षत्र विज्ञान के अनुसार ब्रह्मा (बृह धातु, जिसका अर्थ विस्तार है) में ब्रह्माण्डीय अथवा यह ब्रह्माण्डीय पिंड शक्ति शामिल है, जहां वह स्वयं अपना विस्तार करते हुए ब्रह्मांड की सृष्टि करते हैं।
गूढ़ विज्ञान में यह अविनाशी तथा विकासमान पिंड का वाहक होता है। इस प्रकार, हम ब्रह्मा व बृहस्पति में एक संबंध खोज सकते हैं। बृहस्पति को देव-पितर अर्थात देवपिता भी कहते हैं। इसी प्रकार का संबंध बृहस्पति व आभामंडल अथवा व्यक्ति पिंड में भी दिखाई देता है।
बृहस्पति ग्रह, जो विस्तार का स्वामी है, बैंगनी रंग के समकक्ष है। यह रंग शक्तिपूर्ण आशावाद का प्रतीक है। यदि जन्मकुंडली में प्रभावशाली बृहस्पति पड़ा है, तो ऐसा व्यक्ति स्वभाव से ही विस्तारवादी व आशावान होता है। 3 की संख्या बृहस्पति तथा बैंगनी रंग से संबंधित है।
मंगल दमकता हुआ लाल ग्रह है। यह संगीत के तीव्र सुर G से संयुक्त है व लाल रंग तथा अंक 9 के समकक्ष है। मंगल ग्रह संघर्ष, चोट, घाव, मृत्यु, हत्या, प्यार, सैनिक आदि से संबंधित है। इसके कई रूपों में पैनी वस्तुएं, तलवार, भाला, छुरा व लपलपाती जिह्रा आदि शामिल हैं। अंक 9 पुनर्निर्माण, अध्यात्म, स्वतंत्रता, स्व-विस्तार व परिव्याप्तता का प्रतीक है। मंगल विष्णु से संबंधित है तथा विष्णु इस सृजित ब्रह्मांड को चलाने वाले प्रभु है। ‘विष्’ अर्थात व्याप्त होना। अग्नि, गहनता, उत्साह, तीक्ष्णता आदि मंगल ग्रह के गुण है।
इस ग्रह से संबंधित से सभी गुण, रंग तथा ध्वनियां हमारे लिए इसलिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि ये हमारी भावनाओं को चेतना के माध्यम से प्रभावित करती है।
जब हम संगीत सुनते हैं, तो उससे आलोड़ित होने वाली भावनाओं के प्रति चैतन्य रहते हैं और हमें जो अनुभूति होती है, उसका श्रेय हम संगीतकार को देते हैं। सच तो यह है कि संगीत स्वयं में कुछ नहीं है। जो कुछ है वह उनल यबद्ध कंपनों की श्रृंखला में है, जिससे संगीत का निर्माण होता है और वह वास्तव में पूर्णत: शोररहित पर्यावरणीय गतियां हैं, जो तभी ध्वनि की महत्ता प्राप्त करती हैं, जब वे हमारी चेतना को सीमा में प्रवेश करती हैं।
शुक्र ग्रह को संगीत, कला, काव्य तथा मानव मन की कोमल भावनाओं का प्रतीक माना जाता है। यह समन्वय तथा तालमय कलाओं को अपने में समेटे हुए है। नृत्य, संगीत, काव्य, चित्रकला तथा उद्योग जिनमें कलात्मकता होती है, शुक्र के गुण विद्यमान होते हैं। इसका नीला रंग औषधि की भांति कार्य करता है। शांतिदायक, मृदु व प्रसन्नतादायक नीला रंग स्नायविक विश्राम का प्रतीक है। रंगों के माध्यम से चिकित्सा करने वाले चिकित्सक बहुधा इसका प्रयोग करते हैं। यह संगीत के सुर की प्रतिध्वनि है तथा सभी संगीत वाद्यों में इसका प्रयोग लयबद्धता के लिए किया जाता है।
बुध ग्रह पीले रंग से संबंध रखता है तथा स्पैक्ट्रम में सबसे प्रकाशवान रंग है। बुध मस्तिष्क की तार्किकता व ग्रहणशीलता का प्रतीक है। प्रकाश के द्वारा ही हम विभिन्न वस्तुओं के रूप, आकार को देख पाते हैं और बुध सबसे अधिक प्रकाशवान ग्रह हैं, इसीलिए सभी को जाग्रत करने वाला है।
पीला रंग नीले (शुक्र) के साथ मिलकर प्राकृतिक हरा रंग बनाता है। इसलिए हर्मिस (Hermes) और एफ्रोडाइट (Aphrodite) मिलकर अर्थात बुध व शुक्र मिलकर एक प्राकृति मनुष्य का निर्माण करते हैं।
इस प्रकार अंक 6 शुक्र व अंक 5 बुध मिलकर अंक 11-2 बनाते हैं, जो चंद्र की संख्या है तथा यह हमारी तालिका में हरे रंग से संबंधित है। जब (जो बुद्धि सिद्धांत का प्रतीक है) अपने आकाशीय विपरीत से मिलता है, तो परिणामत: ज्ञान-प्रकाश की उत्पत्ति होती है। ज्ञेयवादियों ने मस्तिष्क के दो रूपों की व्याख्या की है तथा क्रिस्टॉस अर्थात बुध के पिंड के ऊपर उन्होंने इरोज के पिंड को रखा है। बुध को सर्पदंड, जिसे हर्मिस देव का बेंत कहते हैं, के रूप में भी जाना जाता है।
बुध इड़ा व पिंगला नाड़ियों के पारस्परिक मेल का भी प्रतीक हैं। इड़ा व पिंगला इड़ा व पिंगला नाड़ियों के पारस्परिक मेल का भी प्रतीक है। इड़ा व पिंगला सृजनात्मक अग्नि हैं, जो सुषुम्ना में एकीकृत हो जाती हैं। ब्रह्मदंड या रीढ़ की हड्डी, जो योगी की बेंत द्वारा प्रकट की जाती हैं तथा इस बेंत के लघु कटाव व गांठें रीढ़ की हड्डी में होने वाली स्नायविक क्रियाओं का प्रतीक हैं। यह हर्मिक कला या गुप्त ज्ञान का प्रतीक है।
मस्तिष्क की क्रियाओं द्वारा हमारी भावनाएं विचारों में तथा विचार भावनाओं में परिवर्तित होते हैं। इसलिए बुद्धि सिद्धांत द्वारा ही संख्या, जो बुध द्वारा बताई जाती है, भावनाओं से सीधा संबंध रखती है। बुध की संख्या 5 हे तथा यह प्रकृतिमय संख्या मानव जाति के विशिष्ट गुणों का संकेत देती है। चंद्र दो संख्याओं से संबंधित है-7 जो सकारात्मक भाव में है तथा 2जो नकारात्मक भाव में है। संख्या 7 के रूप में यह पूर्ण चंद्र सूर्य के विपरीत क्रियाशीलत है। जब हम जब हम संख्या 1 व 7 का योग करते हैं तो संख्या 8 अशुभ संकेत करती है। नवचंद्र की दशा में संख्या 2 सूर्य संख्या 1 के योग से संख्या 3 बनाती है, जो सौभाग्यशाली संख्या है तथा वर्धनशील भी है, जबकि संख्या 8 हानि की, कमतरी की घोतक है।
संख्या 3 बृहस्पति की संख्या है तथा विस्तार का संकेत देती है तथा संख्या 8 शनि की संख्या है, जो संकुचन का संकेत देती है। सूर्य की युति में चंद्र नकारात्मक या स्त्रीपर्यक होता है, परंतु सूर्य से सातवें घर में होने पर यह सकारात्मक व पुरुष गुणवाला साबित होता है।
चंद्र की संख्या 2 सापेक्षता, हिचकिचाहट, भूलना, परिवर्तन का संकेत देती है, परंतु संख्या 7 पूर्णता व स्थिरता की प्रतीक होती है। हिब्रू प्रणाली में सप्ताह के दिनों के बा संख्यांक आते है, जैसे
रविवार          1-8,  सोमवार    2-9,  मंगलवार    3,    बुधवार           4,
बृहस्पतिवार 5,    शुक्रवार          6 और शनिवार    7

संख्याएं 1 व 8 जीवन व मृत्यु सूर्य के प्रभाव में निहित हैं, जबकि संख्या 2 व 9, जो परिवर्तन व शक्ति की प्रतीक हैं, चंद्र के प्रभाव में आती हैं।
चंद्र हमेशा से पृथ्वी के साथ ही पहचाना जाता रहा है तथा सांकेतिक प्रणालियों में इसका संबंध भौतिक मनुष्य से है। इसे शुक्र ग्रह व मंगल के मध्य रखा जाता है। इसका रंग हरा है, जो नीले व पीले रंग से मिलकर बनता है। (शुक्र व बुध के रंग) इन्हीं दो ग्रहों की संख्याओं 6 व 5 के योग 11-2 अर्थात चंद्र (नकारात्मक) संख्या बनाता है। अब चूंकि हरा रंग धरती पर विद्यमान बनस्पतियों से मिलता है, इसलिए यह प्राकृतिक रंग है तथा स्पेक्ट्रम में नीले व पीले रंगों के मध्य होता है।
अब यदि हम नीले रंगों को विचार का तथा पीले रंगों को भावनाओं का प्रतीक मान लें, तब हमें सम्मिश्रित हरे रंग में प्राकृतिक मनुष्य की आत्माएं मनुष्य की आत्माएं धरती पर चंद्र पिंड से आती हैं। गूढ़ ज्ञानवादी इसे चंद्र का संबंध नहीं मानते, बल्कि एक ऐसे आकाशीय धरातल के परिधिजनक प्रभाव को मानते हैं, जो गुरुत्वाकर्षण के नियमों के अनुसार, धरती के बाहर व चारों ओर चंद्र कक्षा तक विद्यमान हैं।
वह प्रणाली, जो रंगों व संख्याओं के विचारात्मक व भावनात्मक संबंधों की ओर संकेत करती है, संक्षेप में निम्नलिखित रूप से दिखाई जा सकती है।
बृहस्पति    बैंगनी      3    आशा, महत्वाकांक्षी, विस्तार
शनि       जंबुकी नील 8    चिंतन, दर्शन
शुक्र        नीला       6    शुचिता, अध्यात्मक, शांति
चंद्र        हरा        2    संवेदना, परिवर्तनशीलता
बुध        पीला       5    मस्तिष्क, बुद्धि, अनुभूति
सूर्य        नारंगी      4    शक्ति, बल
मंगल      लाल       9    उत्साह, ऊर्जा, आवेग
सूर्य का रंग नारंगी शक्ति के संघनित होने की स्थिति में मंगल के लाल रंग में बदल जाता है। संयुक्तता के सिद्धांत के अनुसार हमें संख्या को विचारों से तथा भावनाओं को रंगों से संबंधित मानना चाहिए। परिणामत: संख्या विज्ञान तथा रंग कला से संबंध रखता है, जिसके द्वारा पहले अवयव में बौद्धिक क्षमता तथा दूसरे में कलात्मक अभिरुचियों का प्रदर्शन देखा जा सकता है।
अपने अन्वेषण को रंगों में रखते हुए हमें ध्वनि की आरंभिक संयुक्तता निम्नलिखित रूप में दिखाई दे सकती है।
सुर C,E,G एक उभयनिष्ठ आरोह-अवरोह का निर्माण करते हैं। उनसे संबंधित संख्याएं हैं-4,5 तथा 9, इस प्रकार 9 में 4+5 समाहित हैं।
सुर D,F तथा A एक विशेष आरोह-अवरोह का निर्माण करते हैं तथा उनसे संबंधित संख्याएं 8,7 तथा 6 हैं।
इस प्रकार, वे 8+7-15-6 का योग लाते हैं, जो संख्या 6 से सुसंगति रखता है। मैं यह नहीं कह सकता कि यह प्रयोग कहां तक आगे बढ़ाया जा सकता है।

अंकों में छिपा है रहस्य


अंक की एक निश्चित शक्ति है, जिसका पता केवल आकृति एवं प्रतीक द्रारा नहीं चल सकता। यह शक्ति वस्तुओं के आपसी गूढ़ संबंधों तथा प्रकृति के सिद्धांतो में निहित है, जिनकी यह अभिवक्यक्ति हैं। यह रहस्योद्घान तब सामने आया, जब मनुष्य ने अंकों के क्रम 0,1,2,3,4,5,6,7,8,9 का विकास किया। उनके द्वारा चाहे जिस प्रतीक को अभिव्यक्त किया गया है।
शून्य (0)- अनंत का प्रतीक है। एक ऐसा अनंत-असीम अस्तित्व, जो विभिन्न वस्तुओं का उद्गम स्रोत है। इस ब्रह्मांड में समग्र सौरमंडल सार्वभौमिकता, विश्वजनीनता, ग्रहों की प्रदक्षिणाओं और यात्राओं में व्याप्त है लेकिन इसका विस्तार यहीं तक सीमित नहीं है, अपितु यह समस्त स्थितियों के निषेध में, प्रत्येक दायरे और सीमाओं में तथा व्यक्ति में व्याप्त है। इस प्रकार, यह सार्वभौम विरोधाभास है। एक तरफ असीम विस्तार है तो दूसरी तरफ असीम लघुता, एक तरफ असीम वृत्त तो दूसरी तरफ एक सूक्ष्म अणु।
एक (1)- सकारात्मक तथा सक्रिय सिद्धांत के प्रतीक रूप में प्रयुक्त होता है। यह शब्दों के लिए भी प्रयुक्त होता है, जो अनंत तथा अव्यक्त की अभिव्यक्ति हैं। यह ‘अहं’ प्रतिनिधित्व करता है, श्रेष्ठता, आत्मस्वीकार, सकारात्मकता, पृथकवाद, आत्मतत्व, गरिमा तथा प्रशासन का भी प्रतीक है। यह धार्मिक अर्थ में स्वयं ईश्वर का प्रतीक है। दार्शनिक व वैज्ञानिक अर्थ में यह संश्लेषण तथा वस्तुओं में मूलभूत अखंडता का प्रतीक है। भौतिकवादी दृष्टि से जीवन की इकाई व्यक्ति है। यह शून्य का प्रकट और सूर्य का प्रतीक है।
दो (2)- विपरीतता का प्रतीक है तथा यह प्रमाण और पुष्टि का भी घोतक है। यह द्विगुण संपन्न अंक है, जैसे एक तरफ जोड़ का है तो दूसरी तरफ घटाने का, एक तरफ क्रियाशीलता का तो दूसरी तरफ निष्क्रियता का, एक तरफ स्त्रीलिंग का तो दूसरी तरफ पुलिंग का, एक तरफ सकारात्मकता का तो दूसरी तरफ नकारात्मक का एक तरफ लाभ तो दूसरी तरफ हानि का प्रतीक है।
तीन (3)- त्रियामिकता का प्रतीक है। जीवन में त्रिगुण पदार्थ बुद्धि, बल व चेतना का प्रतीक है। इसमें सृजन, पालन व संहार के ईश्वरीय गुण भी शामिल है। परिवार, माता-पिता और बच्चे का भी इससे बोध होता हे। यह चिंतन तथा वस्तु रूपी तीन आधार तत्वों का भी प्रतीक है। यह चेतना में प्रतिबिंबित होने वाला द्वैत है, जैसे समय और स्थान में त्रिक अवस्था का निर्माता। आत्मविस्तार, इच्छा, क्रियाविधि तथा प्रभावकारिता है, जो मंगल का प्रतीक है।
चार (4)- वास्तविकता व स्थायित्व का संकेत करता है। यह भौतिक जगत का द्योतक है। यह वर्गाकार व घनाकार है। भौतिक नियम, तर्क व कारण भौतिक अवस्था तथा विज्ञान का प्रतीक है। यह अनुभूतियों, अनुभव तथा ज्ञान के माध्यम से पहचाना जाता है। यह काट, खंडीकरण, विभाजन, सुनियोजन तथा वर्गीकरण है। यह स्वास्तिक, विधिचक्र, संख्याओं का क्रम तथा योग है। यह बुद्धि, चेतना, आध्यात्मिक व भौतिकता के अंतर की पहचान है। इस प्रकार यह बुध का प्रतीक है।
पांच (5)- विस्तार का प्रतिनिधित्व करता है। यह वस्तुओं के अंत: संबंध, समझ-बूझ की क्षमता, निर्णय का भी प्रतीक है। यह वृद्धि, वाकटुता, विचार का विस्तार है। यह न्याय, फसलों, बुवाई तथा कटाई का प्रतीक है। यह अंक अनार के बीज की भांति गुणवाला है। बृहस्पति इसका प्रतीक है।
छह (6)- सहयोग का प्रतीक है। यह विवाह, एक कड़ी में जोड़ने व संबंधों का संकेतक है। पारस्परिक क्रिया, पारस्परिक संतुलन का भी घोतक है। यह आध्यात्मिक व भौतिक जगत का मिलन स्थल है। यह मनुष्य में मानसिक व शारीरिक क्षमता का प्रतीक है। यह मीमांसा, मनोविज्ञान, दैवीय क्षमता, समागम व सहानुभूति का भी प्रतीक है। यह अंक परामनोविज्ञान व मानसिक तुलना का भी प्रतिनिधि है। यह सहयोग, शांति, संतुष्टि व संतुलन की ओर संकेत करता है। यह स्त्री-पुरुष के नैसर्गिक संबंधों का प्रतीक है। इस अंक का प्रतिनिधि ग्रह शुक्र है।
सात (7)- पूर्णता का परिचायक है। यह समय व स्थान, अंतराल तथा दूरी का प्रतीक है। वृद्धावस्था, क्षीणता, सहनशीलता, स्थिरता, मृत्यु का भी प्रतिनिधित्व करता है। यह सात युगों, सप्ताह के सात दिनों आद का प्रतीक है। यह मनुष्य की पूर्णता, बुद्धि, मनोसंतुलन तथा विश्राम का भी द्योतक है। इसका प्रतिनिधि ग्रह शनि है।
आठ (8)- विघटन का अंक है। यह चक्रीय विकास के सिद्धांतों व प्राकृतिक वस्तुओं के आध्यात्मीकरण की ओर झुकाव का प्रतीक है। प्रतिक्रिया, क्रांति, जोड़-तोड़, विघटन, अलगाव, बिखराव, अराजकता के गुण भी इसी अंक से जुड़े है। यह चोट, क्षति, विभाजन, संबंध विच्छेद का भी परिचायक है। यह श्वसन की अंतप्रेरणा, अतिबुद्धिता, आविष्कारों व अनुसंधानों का प्रतीक है। यूरेनस या वरुण इसका प्रतिनिधि ग्रह है।
नौ (9)- पुर्नउत्पादन का प्रतीक है। यह पुर्नजन्म, अध्यात्म, इंद्रियों के विस्तार, पूर्वाभास, विकास व समुद्री यात्राओं का प्रतीक है। यह स्वप्न, अघटित घटना, दूरस्थ ध्वनियों को सुनने का भी प्रतीक है। यह पुर्नरचना, निहारिकामयता, कंपन, लय, तरंग, प्रकाशन, धर्नुविद्या, विचार तरंगों तथा रहस्य का घोतक है। नेपच्यून इसका प्रतिनिधि ग्रह है। 9 अंकों व शून्य के बीच अनंत रूप से विस्तारित हैं। कुछ व्याख्या प्रणालियों के अनुसार शून्य को अंकों में रखा जाता है, ताकि प्रथम व अंतिम अंक को मिलाकर 10 का अंक बनाया जा सके, जो दशमलव प्रणाली का पूर्णांक है, लेकिन हिब्रू प्रणाली के अनुसार अंक 12 के पास ही यह विशिष्ट गुण विद्यमान है, जो 3 और 4 का गुणनफल है और 3 व 4 के योग से बना अंक 7 है, जो एक और पवित्र अंक है। उपरोक्त व्याख्या को किसी भी अंक के इकाई मानकर प्रयोग किया जा सकता है।

आठ अंक वाले जातक तपस्वी व परोपकारी होते हैं


ज्योतिष विद्याओं में अंक विद्या का भी अपना अलग और विशिष्ट महत्व है। जिसके द्वारा हम थोड़े समय में ही प्रशन कर्ता का स्पष्ट उत्तर दे सकते हैं। अंक विद्या में आठ का अंक शनि को प्राप्त हुआ है। शनि परम तपस्वी और न्याय का कारक माना जाता है। इसकी विशेषता पुराणों में प्रतिपादित है। आपका जिस तारीख को जन्म हुआ है। गणना करिये और अगर योग आठ आये तो आपका अंकाधिपति शनिश्चर ही होगा। जैसे 8,17,26 तारीख आदि यथा-17=1+7= 8,26=2+6=8.
अंक आठ वाले जातक धीरे-धीरे उन्नति करते हैं और उनको सफलता देर से ही मिल पाती है। परिश्रम बहुत करना पड़ता है, लेकिन जितना परिश्रम किया जाता है, उतना फल नहीं मिल पाता है। जातक वकील और न्यायाधीश तक बन जाते हैं और लोहा, पत्थर आदि के व्यवसाय से भी जीवन यापन करते हैं। फिर भी हमेशा दिमाग अशांत ही रहता है, वह परिवार से भी अलग हो जाता है और दाम्पत्य जीवन में भी परेशानियां आती है। अत: आठ अंक वाले व्यक्तियों को प्रथम शनि के विधिवत बीज मंत्र का जाप करना चाहिए। उसके बाद साढ़े पांच रत्ती का नीलम धारण करना चाहिए। ऐसा करने से जातक हर क्षेत्र में उन्नति करता हुआ, अपने लक्ष्य को शीघ्र ही प्राप्त करता है और जीवन में तप भी कर सकेगा। जिसके फलस्वरूप जातक का यह लोक और परलोक सार्थक होंगे। शनि प्रधान जातक तपस्वी और परोपकारी होता है, वह न्यायवान, विचारवान, विद्वान, बुद्धि कुशाग्र और शांत स्वभाव का होता है। वह कठिन से कठिन परिस्थितियों में अपने को जिंदा रख सकता है। जातक को लोहा से जुड़े व्यवसायों में अधिक लाभ होता है। शनि प्रधान जातकों की अन्तर्भावना को कोई जल्दी पहचान नहीं पाता है। जातक के अंदर मानव परीक्षक के गुण विद्यमान होते हैं। शनि की गिरफ्त में आया व्यक्ति चालाकी, आलसी, धीरे-धीरे काम करने वाला, शरीर में ठंडक अधिक होने से रोगी, आलसी होने के कारण बात-बात में तर्क करने वाला और अपने को दंड से बचाने के लिए मधुर भाषी होता है।
ऐसे व्यकित का दांपत्य जीवन सामान्य होता है। अधिक परिश्रम करने के बाद भी धन और धान्य कम ही होता है। वैसे व्यक्ति नहीं तो समय से सोते हैं और नहीं समय से जागते हैं। हमेशा उनके दिमाग में चिंता घुसी रहती है। वे लोहा, स्टील, मशीनरी, ठेका, बीमा, पुराने वस्तुओं का व्यापार या राज कार्यों के अन्दर अपनी कार्य करके अपनी जीविका चलाते हैं। शनि प्रधान जातक में कुछ कमियां होती हैं, जैसे वे नये कपड़े पहनेंगे तो जूते उनके पुराने होंगे, हर बात में शंका करने लगेगे, अपनी आदत के अनुसार हठ बहुत करेंगे, अधिकतर जातकों के विचार पुराने होते हैं। उनके सामने जो भी परेशानी होती है सबके सामने उसे उजागर करने में उनको कोई शर्म नहीं आती है। शनि प्रधान जातक अक्सर अपने भाई और बांधवों से अपने विचार विपरीत रखते हैं, धन का हमेशा उनके पास अभाव ही रहता है, रोग उनके शरीर में मानो हमेशा ही पनपते रहते हैं, आलसी होने के कारण भाग्य की गाड़ी आती है और चली जाती है। उनको पहचान ही नहीं होती है, जो भी धन पिता के द्वारा दिया जाता है वह अधिकतर मामलों में अपव्यय ही कर दिया जाता है। अपने मित्रों से विरोध रहता है और अपनी माता के सुख से भी अधिकतर जातक वंचित रहता है।

सम्भोग से समाधि: पूर्ण विज्ञान


ओशो ने इस पतित देश को ७० के दशक में ही भारत के शाश्वत विज्ञान तंत्र से परिचित कराने का दुर्घर्ष प्रयास किया था और अपनी प्रतिष्ठा और जीवन की परवाह नही करते हुए खालिस सत्य का उदघाटन किया . पर इस देश की पतित मेधा ने उसे मूल्य देना तो दूर विवाद का विषय बना कर उस मसीहा के साथ जघन्य दुर्व्यवहार किये. आज उनके पोंगे पंडित यूँ दुराचार के आरोपों में जेल की हवा खा रहे हैं तो बड़े-बड़े साधू लोग सेक्स स्कैंडल के पात्र हैं. देश में सच्चे ब्रह्मचर्य के उद्भूत होने की संभावनाओ को तार-तार करते ये यौन कुंठित धर्म के ठेकेदार इन बिन्दुओ पर यदि पुनः विचार करें तो संभव है की सच्चे ब्रह्मचर्य का आस्वादन कर सकें.
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सम्भोग और समाधि एक ही ऊर्जा के भिन्न तल हैं. निम्न तल यानी मूलाधार चक्र पर जब जीवन ऊर्जा की अभिव्यक्ति होती है तो यह सेक्स बन जाता है. उच्च तल पर समान उर्जा भगवत्ता बन जाती है जिसे समाधि कहा गया है.
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यौन ऊर्जा का अर्थ वीर्य से नही है. वीर्य मात्र यौन ऊर्जा का भौतिक तल है. यौन ऊर्जा का वाहक है वीर्य. यौन ऊर्जा ऊपर गति करती है इसका यह अर्थ नही है वीर्य ऊपर चढ़ जाता है. वीर्य के ऊपर चढने का कोई उपाय नही है. यह मनस ऊर्जा है और अदृश्य है. इसका केवल अनुभव होता है. जैसे हवा अदृश्य है और उसका केवल अनुभव होता है.
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हमारी रीढ़ की हड्डी में ३ सूक्ष्म नाड़िया हैं - इडा- पिंगला- सुषुम्ना. यह मनस उर्जा सुषुम्ना के द्वारा ऊपर का अभियान करती है. इसका सामना सात स्टेशनों से पड़ता है जिसे चक्र कहते हैं. और इस पूरी ऊर्जा की यात्रा को 'कुण्डलिनी जागरण' कहते हैं.
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ध्यान की और तंत्र की ११२ विधियाँ हैं जिनके द्वारा इस ऊर्जा को ऊपर ले जाया जा सकता है. ओशो की समस्त ध्यान विधियाँ यहीं हैं.
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यह विधिया आज से हजारों वर्ष पूर्व विश्व के प्रथम बुद्ध पुरुष भगवान शिव ने पार्वती को कहीं थी जिसे ' विज्ञान भैरव तन्त्र' में संस्कृत में संकलित किया गया है. ओशो ने इसपर तन्त्र सूत्र नामक प्रवचन माला पर अद्भुत प्रवचन दिए हैं.
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प्रत्येक चक्र से शरीर जुडा हुआ है. और हर दूसरा शरीर विपरीत है. अर्थात पुरुष का दुसरा शरीर स्त्री का है और स्त्री का दुसरा शरीर पुरुष का. इसी लिए स्त्रियाँ पुरुषों से अधिक धैर्यवान होती हैं क्यूँ की उनका दूसरा शरीर पुरुष का है जो अपेक्षाकृत मजबूत है.
अर्धनारीश्वर की प्रतिमा यही सन्देश देती है .
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इस प्रकार प्रत्येक शरीर में ७ चक्रों से जुड़े ७ शरीर होते हैं. एक -एक चक्र के जागरण के साथ एक एक शरीर सक्रीय होने लगता है.
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शरीर परस्पर मिल जाते हैं. कुंडली जागरण की यह प्रक्रिया ' अंतर सम्भोग' कही जाती है क्यूँ की एक स्त्री शरीर अपने ही पुरुष शरीर से संयुक्त हो जाती है, इसमें ऊर्जा नष्ट नही होती बल्कि ऊर्जा का एक अनन्य वर्तुल बन जाता है जो आध्यात्मिक जागरण और आंतरिक आनंद के रूप में परिलक्षित होता है. संतो के चेहरे पर खुमारी, तेज, दिव्यता का यही कारण है.
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इस अंतर सम्भोग के अनेक दिव्य परिणाम होते हैं- बाहर के सेक्स से अनंत गुना आनंद और तृप्ति उपलब्ध होती है. प्रत्येक चक्र के जागरण और शरीरो के मिलन से आनंद का खजाना मिलने लगता है. बाहर सेक्स की इच्छा समाप्त हो जाती है. इसी को ब्रह्मचर्य कहते हैं. व्यक्ति ब्रह्म जैसा हो जाता है. उसकी चर्या ब्रह्म जैसी हो जाती है. शिव लिंग का प्रतीक इसी अंतर सम्भोग को परिलाक्ष्यित करता है.
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चक्रों के जगने के साथ उसके सम्बंधित सिद्धियाँ मिल जाती हैं- जैसे ह्रदय चक्र के जगने के साथ विराट करुना व प्रेम के आनंद का भान होने लगता है. आज्ञा चक्र के जगने के साथ व्यक्ति तीनो कालो को जानने वाला हो जाता है. विशुद्दी चक्र के जागने के साथ व्यक्ति जो बोले वह सत्य होने लगता है. प्राचीन आशीर्वाद की कथाये उन्ही ऋषियों की क्षमताये हैं जिनका विशुद्धि चक्र सक्रीय हो गया था.
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सहस्रार चक्र आखिरी चक्र है जिसके सक्रीय होते ही व्यक्ति परम धन्यता को उपलब्ध हो जाता है जब वह ब्रह्म ही हो जाता है- 'अहम् ब्रह्मास्मि' का उद्घोष . उसके शक्ति के अंतर्गत समस्त सृष्टि की शक्तियां उसके पास आ जाती हैं लेकिन वह इनका उपयोग नही करता क्यूँ की उसे यह भी बोध हो जाता है की सृष्टि व इसके नियम उसी के द्वारा बनाये गये हैं.
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परम ज्ञान की अवस्था को समाधि कहा गया है. समाधि का अर्थ है समाधान. इसकी प्रतिभिज्ञा चौथे शरीर से ही होने लगती है. चौथे शरीर से ही परमात्मा का ओमकार स्वरूप पकड़ में आने लगता है. सद्गुरु दीक्षा में ओमकार या अनाहत नाद का एक धागा पकड़ा देते हैं जिसे पकड़ कर साधक अंतिम कुण्डलिनी जागरण तह आसानी से चला जाता है. जो गुरु यह करने में सक्षम है उसे ही पूरा गुरु कहा जाता है. इस योग को सहज या विहंगम योग कहते हैं. मन्त्र दान का अर्थ है 'गुरु द्वारा ॐ का अनुभव करा देना' जो गुरु मन्त्र जाप करने को कहता है वह गुरु नही है- धंधा कर रहा है आध्यात्म के नाम पर.
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परम आनंद, परम दिव्यता,बुद्धत्व, कैवल्य, जिनत्व , परम धन्यता, ब्रह्मचर्य आदि शब्द एक ही हैं और उपलब्ध होते हैं यौन ऊर्जा को सही और वैज्ञानिक दिशा देने से. न की काम का दमन करने से. ओशो जीवन पर्यंत यही देशना गली-गली देते रहे पर इस देश की कुंठित मानसिता ने उनके गहनता को न समझा और मात्र उस मसीहा पर आक्षेप किये. उनकी पुस्तक सम्भोग से समाधि की और में यही विज्ञान पूरा वर्णित है.
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मेरी यही कामना है की यौन ऊर्जा का सदुपयोग करते हुए क्यूँ न हाँ ब्रह्म का अभियान करे? क्यूँ इसके दास बन कर जियें.? क्यूँ एक निस्तेज जीवन जियें? क्यूँ न एक पूरा गुरु के शरण में जा कर जीवन में ब्रह्मचर्य पैदा करें.?

भारत की भूतिया जगह.......

1.) भानगड़ किला, राजस्थान

यहां सूरज ढलते ही इस किले में अगर कोई रुक पाता है, तो वो हैं वहां वास कर रहीं आत्माएं। यकीन मानिए, भानगड़ किला बाहर से दिखने में जितना सुंदर है, उसके अंदर काले जादू का आगोश है। इस किले की भूतिया कहानी के पीछे है वो शाप, जो तांत्रिक सिंघीया ने भानगड़ की राजकुमारी रत्नावती को दिया था। रत्नावती की वजह से ही इस तांत्रिक की मृत्यु हुई थी। दरअसल, राजकुमारी रत्नावती से सिंघीया नाम का व्यक्ति बहुत प्यार करता था। एक दिन राजकुमारी रत्‍नावती एक इत्र की दुकान पर पहुंची और वो इत्रों को हाथों में लेकर उसकी खुशबू ले रही थी।सिंघीया उसी राज्‍य में रहता था और वो काले जादू का महारथी था। इसलिए उसने उस दुकान के पास आकर एक इत्र के बोतल जिसे रानी पसंद कर रही थी उसने उस बोतल पर काला जादू कर दिया जो राजकुमारी के वशीकरण के लिए किया था। लेकिन राजकुमारी रत्‍नावती ने उस इत्र के बोतल को उठाया, लेकिन उसे वही पास के एक पत्‍थर पर पटक दिया। पत्‍थर पर पटकते ही वो बोतल टूट गया और सारा इत्र उस पत्‍थर पर बिखर गया। इसके बाद से ही वो पत्‍थर फिसलते हुए उस तांत्रिक सिंघीया के पीछे चल पड़ा और तांत्रिक की मौके पर ही मौत हो गई। मरने से पहले तांत्रिक ने शाप दिया कि इस किले में रहने वालें सभी लोग जल्‍द ही मर जायेंगे और वो दोबारा जन्‍म नहीं ले सकेंगे और ताउम्र उनकी आत्‍माएं इस किले में भटकती रहेंगी। आज उस किले में मौत की चींखें गूंजती हैं। भारत की सरकार ने भी इस किले में शाम के बाद एंट्री बद की हुई है।

2.) दुमास बीच, गुजरात

इस बीच पर हिंदुओं के शवों का दाह-संस्कार किया जाता है। लेकिन शाम के बाद यहां कोई नहीं रुक पाता। क्योंकि लोगों को अकसर यहां अजीब-गरीब आवाज़ें सुनाई देती हैं। यहां कई बार गतिविधियां भी महसूस होती हैं, मानो जैसे वहां कोई हो। जबकि आस-पास कोई नहीं होता। ऐसा माना जाता है कि यहां हर ओर मरे हुए लोगों की रूहें हर पल मौजूद रहती हैं।

3.) दाऊ हिल,कुर्सियांग, पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल के कुरसियांग में स्थित दाऊ हिल भारत की सबसे भुतहा जगहों में से एक है। इस पहाड़ी के जंगलों में बहुत सारी हत्याएं की गई हैं जिनकी वजह से यहां बहुत ही डरावना महसूस होता है। यहां के स्थानीय निवासियों ने सर्दियों के मौसम में इसी हिल के नजदीक स्थित विक्टोरिया स्कूल के गलियारों में आत्माओं को चलते हुए महसूस किया है और उनके कदमों की आवाजें भी सुनी हैं। यहां के लकड़हारों ने कई बार लकड़ी काटते हुए इन्हीं जंगलों में बिना सिर वाले लड़के को चलते हुए देखा है और धीरे-धीरे वह पेड़ों के बीच गायब हो जाता है। इन जंगलों और स्कूल में कई बार इस तरह की अजीबोगरीब और डरावनी हरकतें रिकॉर्ड की गई हैं।

4.) राजकिरन होटल, लोनावाला, महाराष्ट्र

पता : बी वार्ड, सी.एस. नंबर- 162, लोनावाला, मुंबई। मुंबई के इस गेस्ट हाउस में जो भी आता है, वो कोई न कोई किस्सा लेकर इस गेस्ट हाउस से बाहर ज़रूर निकलता है। किसी को लगता है कि रात को सोते समय कोई उसके कानों में कुछ-कुछ बोल रहा है, किसी की बेडशीट खुद ही सरकने लगती है, तो किसी को अजीब-गरीब आहट सुनाई देती है। ग्राउंड फ्लोर पर बने इस कमरे को अब वहां का मालिक भी रेंट पर नहीं देता।  

5.) दिल्ली कैंट, दिल्ली, दिल्ली के सेक्टर- 9, द्वारका

कहते हैं कि सेक्टर- 9 के मेट्रो स्टेशन के पास पीपल का एक पेड़ है जहां रूहों का वास है। और इसलिए लोगों ने वहां भगवान की मूर्तियां भी लगाई हुई हैं। इसके अलावा यह भी सुनने को मिला है कि इस जगह पर उन्‍होंने एक सफेद रंग के लिबास में औरत देखी है जो लोगों से लिफ्ट मांगती रहती है और जब वे उसे लिफ्ट देते हैं तो वह अपने आप ही गायब हो जाती है। लेकिन जो लिफ्ट देने से मना करता है, उसका क्या हाल होता है ?, यह किसी को नहीं पता।

6.)शिमला के IGMC अस्पताल  का भूत

शिमला में एक इंदिरा गांधी मेडिकल हॉस्पिटल स्थित है। ये पूरे हिमाचल का सबसे बड़ा अस्पताल है। यहां पर जो लोग इलाज कराने आते हैं अथवा जो यहां से इलाज कराके वापस जाते हैं, उनमें से हर माहिने किसी ना किसी की मौत हो जाती है। कहा जाता है कि जिन लोगों की भी मौत IGMC के अंदर हुई थी वे आज भी हॉस्पिटल के गलियारों, वार्ड्स और लिफ्ट में घूमा करते हैं। इस अस्पताल को उन भूतों का अड्डा माना जाता है। यहां आने वाले कई लोग भूतों के इस समूह का अनुभव कर चुके हैं।यहां पर कई अजीब तरह की आवाजें सुनी हैं और ये आवाजें लोगों को उनके नाम से ही बुलाती हैं। कुछ लोग ये भी बताते हैं कि कभी जब वे गलियारे में अकेले होते हैं और अगले ही पल वे अपने आस-पास किसी को महसूस करते हैं। फिर कोई उन्हें धक्का देता है और वे जीने पर से नीचे गिर जाते हैं। यहां पर कई लोग ये भी बताते हैं कि कभी-कभी वे घंटों तक अस्पताल की लिफ्ट में फंसे रहे और फिर अचानक लिफ्ट अपने आप चालू हो गई। गलियारों और वार्डों में भयानक शोर सुनना यहां के लोगों के लिए एक बहुत ही आम अनुभव है।

7.)शिमला के CJM स्कूल का भूत

शिमला का कॉन्वेंट ऑफ जीसस मैरी चेलेसा स्कूल यहां के मोस्ट फेमस गर्ल्स स्कूल्स में से एक है। इसके बारे में भी कहा जाता है कि ये हॉन्टेड है। यहां पर 13 तारीख के शुक्रवार की कहानी बहुत ही कुख्यात है। अगर महिने में 13 तारीख को शुक्रवार पड़ता है तो यहां पर बच्चे स्कूल आने में बहुत ही डरते और घबराते हैं और स्कूल से वापस जाने के लिए जिद करते हैं। बताते हैं कि 13 तारीख के शुक्रवार के एक बिना सिर वाला घुड़सवार स्कूल के अंदर आता है और यहां किसी लड़की को एक गुलाब भेट करता है। अगर लड़की गुलाब को स्वीकार कर लेती है तो वह उस लड़की को अपने साथ ले जाता है और लगर लड़की इन्कार कर देती है तो वह घुड़सवार उसे मार डालता है। इसकी वजह के बारे में बताया जाता है कि ब्रिटिशर्स के समय में ये एक अनाथालय था और इसके शयनागार वाले क्षेत्र को जला दिया गया था। और यहां रहने वाले कई बच्चों को उसी आग में जिंदा जला दिया गया था। इस बारे में एक लड़की की कहानी और भी फेमस है जो इस आग में जल गई थी। कहा जाता है कि उस लड़की के पास एक गुड़िया होती है और इसके बावजूद वह दूसरे लोगों से गुड़िया के लिए पूछती है या गुड़िया की मांग करती है। वह अधिकतर स्कूल के चपरासियों और यहां की सिस्टर्स से ऐसा करती है। जहां पर उस अनाथालय में बच्चों को जलाया और दफनाया गया था, उस एरिया में अब बच्चों के खेलने के लिए झूले बनाए गए हैं।

8.) IGMC रोड ,(शिमला)

शिमला में जो सड़क जंगल से IGMC को जोड़ती है उसे कई भूतों द्वारा कब्जा कर लिया गया है। इस सड़क पर सन् 1960 के समय में एक आदमी लोगों को संतरे बेचने का काम करता था। कहा जाता है कि उसकी मौत भी उसी जगह पर हुई थी, लेकिन आज भी कई लोगों ने उसे वहां पर संतरे की टोकरी के साथ देखा है। वो आदमी आज भी उस सड़क पर टहलता दिख जाता है। लेकिन लोग ये भी बताते हैं कि वो किसी को भी नुकसान नहीं पहुंचाता है।

9.) चुड़ैल बाड़ी,(शिमला)

चुड़ैल बाड़ी शिमला में ही नवभार से छोटा शिमला जाने वाले एक हाईवे के बीच में स्थित है। ये वो जगह है जहां जाने पर आपके वाहन की स्पीड अपने आप धीमी हो जाती है। इससे पहले आप चाहें जितना तेज गाड़ी चला रहे हों या चाहें जितनी एक्लीलेरेटर दबा रहे हों, लेकिन आपके वाहन की गति धीमी हो जाती है। यहां पर कई लोगों ने रात के समय़ में एक औरत को सफेद साड़ी पहने देखा है जो अपने लंबे काले बालों से अपना चेहरा ढके रहती है।जो लोग रात को इस रास्ते पर सफर करते हैं, ये महिला उनसे लिफ्ट मांगती है। और अगर आप लिफ्ट देने से मना भी कर देते हैं तो भी आपको ये महसूस होता है कि कोई आपकी गाड़ी की पिछली सीट पर बैठा है। कुछ लोग इसी वजह से काफी परेशान हो जाते हैं और उनका एक्सीडेंट हो जाता है।

10.)रामोजी फिल्म सिटी, हैदराबाद (आंध्र प्रदेश)

हैदराबाद में स्थित रामोजी फिल्म सिटी के बारे में भी एक भयानक घटना प्रचलित है कि इसे निजाम सुल्तान की उस जमीन पर बनाया गया है जिस पर युद्ध किया गया था। रामोजी फिल्म सिटी हैदराबाद में स्थित एक बहुत बड़ी फिल्म सिटी है। लेकिन वहां पर हरेक शूटिंग के समय सामान्य तौर पर कुछ ना कुछ अजीब और डरावनी घटनाएं होती रहती हैं जैसे लाइट्स का गिरना, कपड़ों का अपने आप फटा पाया जाना, लाइटमैन को ऊपर से अदृश्य हाथों द्वारा धकेला जाना, आईनों के किनारों पर उर्दू भाषा में अजीबोगरीब निशान उभर आना आदि। इन सभी घटनाओं को व्यापारिक वजहों से जाहिर नहीं किया जाता है। और शायद इसी वजह से यहां पर ये भुतहा हरकतें रूकती नहीं हैं।

11.)जीपी ब्लॉक, मेरठ (उत्तर प्रदेश)

उत्तर प्रदेश के जिला मेरठ का जीपी ब्लॉक बहुत ज्यादा प्रचलित या प्रसिद्ध तो नहीं है लेकिन ये एक भुतहा जगह है। जीपी ब्लॉक एक दो मंजिला घर है और जो लोग इस इलाके से गुजरते हैं वो बताते हैं कि उन्हें इस घर की छत पर लड़कों की आत्मा बैठी हुई दिखती है। कुछ लोगों ने तो इस घर से लाल ड्रेस में लड़कियों को निकलते हुए भी देखा है। और एक दृश्य जो यहां के लोगों ने सबसे ज्यादा बार देखा है वो ये है कि चार लड़के इस घर में अपने बीच एक मोमबत्ती जलाकर बैठते हैं और बियर पीते हैं। ऐसी घटनाओं को देखते हुए लोगों ने इस रास्ते से जाना ही बंद कर दिया है।

12.)होटल सवॉय, मसूरी (उत्तराखंड)

होटल सवॉय भारत के सबसे भुतहा होटलों में से नंबर एक है। मसूरी में स्थित ये होटल सन् 1902 में खोला गया था। इसके बाद सन् 1910 में यहां पर एक बेहद रहस्यमयी हालत में एक डेड बॉडी पाई गई थी। बताया जाता है कि इस होटल का हॉल और यहां के गलियारे एक महिला के भूत से बाधित हैं जिसका नाम गार्नेट ऑर्म था। ये औरत जहर देकर मारी गई थी और वह आज भी उस आदमी को खोजती है जिसने उसे जहर दिया था। वो इस होटल के गलियारों में रात को घूमती है और कई बार यहां रूकने वाले लोगों को दिखी है। लोग बताते हैं कि जब भी कोई उसके सामने आता है तो वह बिना किसी भाव के उसे देखने लगती है जो बहुत ही डरावना होता है।

13.)शनिवारवाड़ा किला, पूने (महाराष्ट्र)

पूने की शनिवारवाड़ा किला अपने ऐतिहासिक अस्तित्व के साथ-साथ इससे जुड़ी भुतहा कहानियों की वजह से जाना जाता है। इस किले में पेशवा राजवंश के 13 वर्षीय बालक नारायण की उसी के किसी सगे-संबंधी द्वारा बहुत ही बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। बताया जाता है कि अपनी हत्या के समय वह बच्चा पूरे किले में अपनी जान बचाने के लिए दौड़ता रहा था और चिल्लाता रहा था कि 'काका, माला वाचवा।' (काका, मुझे बचा लो।) इस समय उसका हत्यारा उस बच्चे के पीछे ही भाग रहा था। यहां के स्थानीय निवासी बताते हैं कि आज भी जब पूरे चांद की रात अर्थात् पूर्णिमा की रात होती है तो ये बच्चा इन्हीं चीखों के साथ पूरे किले में भागता रहता है। पूर्णिमा की रातें इस महल की सबसे डरावनी रातें होती हैं।

14.)डिसूजा'स चॉल, मुंबई (महाराष्ट्र)

मुंबई के महिम में स्थित डिसूजा'स चॉल भारत की दूसरी सबसे डरावनी जगह है। बताया जाता है कि कुएं से पानी निकालते समय एक महिला की यहां पर मौत हो गई थी। कई स्थानीय निवासियों ने ये दावा किया है कि रात के समय उन्होंने कुएं के पास एक महिला की आत्मा देखी है। लोग बताते हैं कि वो महिला बहुत ही डरावनी दिखती है। इस स्थान पर अकेले जाना या अकेले घूमना बिल्कुल भी सेफ नहीं है।

15.)ब्रिज राज भवन पैलेस, कोटा (राजस्थान)

कोटा में स्थित ब्रिज राज भवन लगभग 175 साल पुराना है तथा इसे कोटा के एक राजपरिवार द्वारा अधिग्रहीत किया गया था। सन् 1980 में ये पैलेस एक  होटल में परिवर्तित हो गया। लेकिन ये पैलेस भी भुतहा है और बताया जाता है कि जो भूत यहां रहता है उसका नाम मेजर बर्टन है। मेजर बर्टन को भारतीय सिपाहियों द्वारा मार डाला गया था। ये उस समय की बात है जब कोटा में अंग्रेजों का शासन था। मेजर बर्टन को उसके दो बेटों के साथ इसी बिल्डिंग के सेंट्रल हॉल में मारा गया था। मेजर बर्टन का भूत एक छड़ी लेकर पूरे महल में घूमता रहता है। दिन में तो इस भूत के द्वारा किसी को नुकसान पहुंचाने की खबर तो नहीं आई है लेकिन बताया जाता है कि अगर रात में कोई गार्ड यहां पर सो रहा होता है तो ये भूत उन्हें डराता है तथा उन्हें थप्पड़ भी मारता है।

16.)ग्रांड पैराडी टावर्स,मुम्बई (महाराष्ट्र )

मुंबई में सबसे मशहूर और सबसे समृद्ध क्षेत्रों में से एक में स्थित है ग्रांड पैराडी टॉवर जिसे कभी कभी ग्रैंड पैरारी के नाम से भी जाना जाता है। इमारत 1976 में निर्माण किया गया था जिसके बाद से घातक दुर्घटनाओं और आत्महत्या के 20 मामलों में वहाँ के रहवासियों को हिल कर रख दिया। यहां कई लोगों ने  बच्चों समेत खिड़की से कूदकर आत्म हत्या की। और तो और कुछ घरों में तो नौकरानियों ने भी उसी तरीके से आत्महत्या कर ली जिससे एक बात तो साफ हो गई कि इन सभी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं के पीछे बुरी ताकतों का हाथ है। इन सभी घटनाओं पर विराम लगाने के लिए सोसाइटी के लोगों ने मिलकर फिर पूजा और यज्ञ-हवन करवाया जिसके बाद इन घटनाओं पर विराम लग गया। मगर आज भी 8वीं मंजिल का वो फ्लैट में रुकने की हिम्मत कोई नहीं कर सकता है।

17.)मुकेश मिल्स ,कोलाबा,मुंबई (महाराष्ट्र )

1980 में बंद हुई कोलाबा में इस विशाल मिल में कई फिल्मों और विज्ञापनों की शूटिंग यहां किया गया है। सुनसान मुकेश मिल्स खासकर रूहानी ताकतों का अड्डा माना जाता है।और हॉरर फिल्मों और गोथिक शो के लिए तो ये स्वर्ग सरीखा है। यहां कई सेट हैं मगर जिन एक्टरों और एक्ट्रेसेस ने यहां शूटिंग की है वे तो इसका नाम सुनते ही तौबा कर लेते हैं। और तो और जो यहां काम करने को राजी भी हो जाते हैं वो भी रात की शूटिंग से यहां बचते हैं। वजह है यहां अतृप्त आत्माओं का वास होना जो समय-समय पर यहां अपने वजूद का एहसास दिलाते रहती है।

18.)संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान,मुंबई (महाराष्ट्र )

मुंबई के उत्तरी किनारे पर स्थित इस बड़े संरक्षित क्षेत्र से गुजरते वक्त आपकी नस-नस में सनसनी गुजर जाना एक आम बात है।अगर इसी इलाके से आप रात के सुनसान विराने में गुजरे तो आपको ऐसे-ऐसे एहसास होंगे जो आपके रौंगटे खड़े करने के लिए काफी हैं। यहां रात को गुजरने पर आपको अनचाही आवाजों के साथ-साथ कुछ ऐसी चीजें भी देखने को मिल जाएंगी जो आपके हलक को सुखा सकती हैं।सफेद साड़ी में लिपटी महिलाएं देखना, डरावनी चीखें सुनना और अतृप्त आत्माओं द्वारा गाड़ी में लिफ्ट मांगना कुछ ऐसे खास एहसास हैं जो यहां के लोगों को अक्सर होते रहते हैं। इस बात की गवाही यहां वे वनरक्षक भी देते हैं।

19.)टॉवर ऑफ साइलेंस,मालाबार हिल,मुंबई (महाराष्ट्र )

पूरे विश्व ये अपने तरह का एक मात्र ऐसा खास इलाका है जहां के खौफनाक मंजर केवल भूतीया अनुभवों तक ही सीमित नहीं है बल्कि उससे काफी बढ़कर हैं। यहां तो दिन में ही एक से बढ़कर एक खौफनाक मंजर आपको देखने को मिल जाएंगे।टॉवर ऑफ साइलेंस दरअसल पारसी कब्रिस्तान है। यहां पारसी समुदाय के लोग अपने मृत जनों का अंतिम संस्कार करते हैं।पारसी समुदाय अपने मृतकों के शव को न जलाते हैं, न दफनाते हैं बल्कि यही लाकर खुले में छोड़ जाते हैं गिद्धों और अन्य मांस भक्षी पक्षियों और जानवरों के लिए......और ये ही यहां से जुड़े सबसे बड़ी खौफ की वजह भी है।यहां पर अगर कोई दिन में जाने की गलती कर भी ले तो रात में तो कतई यहां कोई जाने की न हिमाकत कर सकता है ,यहां अक्सर सफेद कपडो़ं में एक बेहद हसीन किशोरी देखी जाती है जो रात के वक्त यहां से गुजरने वालों से लिफ्ट मांगती है। इसके अलावा एक पारसी परिवार की आत्माओं को देखे जाने का भी दावा किया जाता है जो इसी जगह एक कार एक्सीडेंट में मारे गए थे। वे भी आते-जाते लोगों को अक्सर दिख जाते हैं। वे लोगों को गाड़ी खराब होने के बहाने से अपनी ओर आकर्षित करते हैं और मदद की अपील करते हैं। ये दोनों ही आत्माओं ने यहां से गुजरने वाले कुछ लोगों को नुक्सान भी पहुंचाया जिसके बाद यहां के बारे में ये बात प्रचलित हो गई कि यहां कभी भी जाना खतरे से खाली नहीं है और जाने-अनजाने अनिष्ट को चुनौती देना है।   

20.) तहसील पोहरी,शिवपुरी,भोपाल ,(मध्य प्रदेश )

यह रहस्यमयी किला है शिवपुरी जिले की तहसील पोहरी में। एक नहीं, कई लोगों का मानना है कि इस किले में रात को भूत-प्रेतों की महफिल जमने लगती है। घुंघरूओं की आवाजें दूर-दूर तक सुनाई पड़ती हैं। कुछ लोगों ने दुस्साहस दिखाते हुए इस महफिल को देखने की कोशिश की, तो वे मौत के मुंह में चले गए। इस किले का इतिहास करीब 2100 साल पुराना बताया जाता है। यह किला समीपवर्ती शहर नरवर शासन के सेनापति वीर खांडेराव का निवास रहा है। उनकी मृत्यु के बाद यहां संभवत: कोई दूसरा आदमी या परिवार स्थायीतौर पर टिक नहीं पाया। रात में यहां से घुंघरूओं की आवाज आती है।यहां कई लोगों ने आत्माएं घूमते देखी हैं।कुछ लोगों का मानना है कि यहां खजाना छिपा हुआ है। भूत-प्रेत उसी की रखवाली करते हैं। कुछ लोगों ने इस खजाने को चुराने के मकसद से किले में सेंधमारी भी की, लेकिन उनका बुरा हश्र हुआ।

21.)हारांगुल गांव,जिला लातूर,(महाराष्ट्र)

ऐसा माना जाता है कि 15वीं शताब्दी में पहली बार यहा डायन प्रथा इस गांव से शुरू हुई। डायन प्रथा के यहां शुरू होने से काले जादू के बल पर आम महिलाओं के डायनों में परिवर्तित हो जाने के बाद इस गांव की पहचान हमेशा-हमेशा के लिए बदल गई।इस गावों के निवासियों ने उन डायनो को मारना शुरू किया ,पर वो आज भी यहा भटकती है , इसी वजह से इस गांव में आज भी पेड़ों पर कील ठोंकना, पेशाब करना, थूकना या रात को पेड़ों के पास सोना बुरी घटनाओं को न्योता देने वाला माना जाता है।गांव में आज भी मान्यता है कि रात में इन डायनों की आत्माएं लोगों को आकर्षित करने की कोशिश करती हैं। अब वे पहले जितनी ताकतवर तो नहीं रहीं कि सीधे तौर पर किसी को नुकसान पहुंचा सकें पर जो कोई भी इनके द्वारा डाले गए डोरे में फंस जाता है उसका बड़ा ही बुरा हष्र होता है।     

22.)खूनी दरवाजा ,बहादुरशाह जफर मार्ग पर दिल्ली गेट,(दिल्ली)

यह दरवाजा बहादुरशाह जफर मार्ग पर दिल्ली गेट के पास स्थित है।यह जगह उतनी ही डरावनी है जितना की इसका नाम।कहा जाता है कि इस स्थान पर मुग़ल सल्तनत के तीन शहजादे मरने के बाद आज भी अपने साथ हुए अपमान का बदला लेने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। दरअसल अंग्रेज कैप्टेन हडसन ने बहादुरशाह जफ़र के दो बेटों मिर्जा मिगल और क्रिज सुलतान तथा पोते अबू बकर को गिरफ्तार किया और नंगा कर गोली मारकर उनकी बेरहमी से हत्या कर दी थी।

23.)महरौली गाव ,जमाली-कमाली मस्जिद ,(दिल्ली)

जमाली-कमाली मस्जिद दिल्ली के पुरातत्व गांव महरौली में स्थित है।इस मस्जिद का नाम दो इंसानों के नाम पर पड़ा जिनमे से एक का नाम जमाली जो कि एक सूफी संत थे और दूसरे का नाम कमाली था।दोनों सूफी संतों को इस जगह दफनाया गया था। कहा जाता है कि वीरान सी दिखने वाली इस जगह पर जिन आकर नमाज अदा करते हैं।वैसे तो इस वीरान जगह पर कोई आता जाता नहीं लेकिन यदि गलती से भी कोई जिन्नाद की नमाज के दौरान पहुंच गया तो जिन उनपर थप्पड़ों की बरसात कर देते हैं।

24.)संजय वन ,(दिल्ली)

इस स्थान को खांडवप्रस्थ के नाम से भी जाना जाता है और इस स्थान को ही पांडवों से भगवान कृष्ण की मदद से इन्द्रप्रस्थ के रूप में तैयार किया। वैसे तो यह एक खूबसूरत जंगली इलाका है और यहां बरगद के बड़े-बड़े पेड़ स्थित हैं।लोग बताते हैं कि कई बार लोगों ने इस स्थान पर  सफ़ेद कपड़ों में लिपटी हुई किसी औरत को छिपते देखा है।

25.)लोथियन सेमेट्री ,कश्मीरी गेट ,(दिल्ली)

पुरानी दिल्ली में में कश्मीरी गेट के पास स्थित यह स्थान एक ईसाई कब्रिस्तान है।यह कब्रिस्तान देखने में काफी सुन्दर जगह प्रतीत होती है लेकिन कुछ भूतिया कहानियों ने लोगों के दिल में इस स्थान के बारे में एक खौफ पैदा कर दिया है।कहा जाता है यहां एक सिपाही को दफनाया गया था जिसने अपनी प्रेमिका द्वारा ठुकराए जाने पर अपना सिर काट लिया था और तब से हर अमावस्या के दिन उस सिपाही का भूत इस स्थान पर टहलता नजर आता है।

26.)दिल्ली कैट , (दिल्ली)

दिल्ली कैंट वह स्थान है जिसका निर्माण ब्रिटिश इंडियन आर्मी ने करवाया था और जहां आज इंडियन आर्मी का हेडक्वार्टर स्थित है।हरियाली से भरपूर एक खूबसूरत जगह होने के बावजूद भी यहां से गुजरने वाले हर शख्स के दिल में एक अजीब सा डर भर जाता है। कई लोगों का कहना है कि इस स्थान पर सफ़ेद पोशाक में एक लड़की लिफ्ट मांगती नजर आती है और जैसे ही लोग उसे लिफ्ट देते हैं वह लड़की अपने आप ही गायब हो जाती है।

27.)कुलधरा गांव,जिला जैसलमेर,(राजस्थान)

यह गांव है राजस्थान के जैसलमेर जिले का कुलधरा गांव। कहा जाता है कि यह गांव पिछले दो सौ सालों से रूहानी ताकतों के कब्जे में हैं। प्रशासन ने इस गांव की सरहद पर एक फाटक बनवा दिया है जिसके पार दिन में तो सैलानी घूमने आते रहते हैं लेकिन रात में इस फाटक को पार करने की कोई हिम्मत नहीं कर सकता।ऐसा कहा जाता है कि  गांव का यह वीराना एक दीवान के पाप के कारण है, यह गांव आज तक नहीं बस पाया उसके पीछे पालीवाल ब्राह्मणों का श्राप है जो उन्होंने राजा के पाप करने पर दिया था।आज वीरान खंडहरों में तब्दील हो चुका गांव बारहवीं शताब्दी में पालीवाल ब्राह्मणों की राजधानी हुआ करता था, जिसकी सम्रद्धि के चर्चे पूरे राजस्थान में थे। यहां की इमारतों की वास्तुकला मन को मोहने वाली हुआ करती थी, आज भी यहां के खंडहरों की नक्कासी देखकर उन पालीवाल ब्राह्मणों की सम्रद्धि का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।

डाक्टर vs प्रेत

दोस्तोँ एक अन्य अनुभव शेयर कर रहा हूँ जो कि पश्चिमी चिकित्सा और पारलौकिक विज्ञान के बीच का युद्ध है। आपको शायद पढ़ने मेँ ये किसी फिल्म की कहानी लगे परंतु ये अक्षरशः सत्य है क्योँकि मेरे पिताजी, ताऊ ताईजी और उनके अनेको पड़ोसी इसके प्रत्यक्षदर्शी हैँ। बात सन 1977 के करीब की है मेरे एक चचेरे ताऊ जो कानपुर मेँ ही शहर के दूसरे हिस्से मेँ रहते थे, के बगल वाले मकान मेँ उस इलाके के एक प्रतिष्ठित डॉ रहते थे जो लंदन से एमडी करके आए थे। दोनो परिवारोँ मेँ काफी करीबी संबंध थे इसलिए मेरे पिताजी की भी डॉ साहब से अच्छी दोस्ती थी और एक दो बार मेरे पिताजी ने भी ये घटना देखी। परिवार डॉ साहब की पत्नी, माँ, एक बेटी और बड़ा भाई, भाभी और उनके बच्चे थे। बेटी करीब 14 साल की और बहुत सुंदर थी। 
एक दिन स्कूल से घर आने के बाद उसकी तबियत कुछ बिगड़ गयी, घर वालोँ ने फोन किया तो डॉ साहब ने दवा बता दी, कुछ आराम मिला, क्लीनिक से लौटकर उन्होँने यथोचित इलाज किया और करते रहे। उनके इलाज से आराम तो था पर रोग बना रहा धीरे धीरे बेटी ने स्कूल जाना बंद कर दिया और बिस्तर पर पड़े पड़े कभी हँसती कभी अजीब अजीब चेहरे बनाती तो कभी आवाजेँ निकालती, आदमियोँ जैसी भी। डॉ साहब दवा खिलाते और इंजेक्शन लगाते रहे। इसी तरह कई दिन बीत गये। लड़की का रंग काला पड़ने लगा, शरीर सूखने लगा तो लक्षण देख बड़े बुजुर्गोँ और पड़ोसियोँ ने झाड़ फूँक कराने की सलाह दी। पत्नी, भाभी और माँ ने जब ये बात उनके सामने रखी तो वे बरस पड़े और सबको अँधविश्वासी तथा गँवार बता दिया। यदि कभी अन्य किसी ने उनकी मौजूदगी मेँ ये सलाह देदी तो लंदन मेँ पढ़े लिखे डॉ साहब उसे भी बुरी तरह डाँट देते। सारे टेस्ट करवा चुके थे बड़े शहरोँ के डॉक्टरोँ से मश्विरा कर इलाज कर रहे थे पर बेटी की हालत जस की तस। उनके सामने तो कुछ नहीँ हो सकता था इसलिए उनके क्लीनिक जाने के बाद परिवार ने एक झाड़ फूँक वाले को बुलवाया, परंतु लड़की की हालत देख उसने हाथ खड़े कर दिये और अपने गुरू जो बहुत मशहूर ताँत्रिक था, से सम्पर्क करने को कहा और कहा कि इसे बाँध दो और कमरे मेँ बंद कर दो वरना ये अपनी जान ले सकती है, एक दो बार उसने ऐसी कोशिश करी तो घरवालोँ ने उसे बाँध दिया। डॉ साहब की गैरमौजूदगी मेँ उसके गुरु को भी बुलाया गया, गुरू ने कुछ तंत्र क्रियाएँ कर जल सिद्ध किया और उसके छीँटे मारे तो जैसे तूफान आ गया। 
लड़की जोरोँ से पुरूष की आवाज मेँ चीखने लगी, गुरु ने कुछ मँत्र पढ़े और छीँटे मारे तो फिर वो हँसने लगी और बोली "तू जानता नहीँ मैँ कौन हूँ तेरे जैसे तांत्रिकोँ को तो चुटकी मेँ उड़ा दूँगा।" बिस्तर पर बँधे हुए ही उसने अचानक उछल कर ताँत्रिक को चाँटा मारने की कोशिश की, बो किसी तरह बच तो गया पर लड़की की दो अँगुलियाँ उसकी छाती से छू गयी और वो कई फुट पीछे जा गिरा। लोगोँ की मदद से जैसे तैसे उठा उसकी छाती पर ऐसे निशान बन गये थे जैसे किसी ने बेँत से पीटा हो। हिम्मत जुटाकर उसने लड़की को शाँत करने और पुनः रूग्ण रूप मेँ लाने की कोशिश की पर असफल रहा क्योँकि लड़की के अंदर मौजूद शैतान बहुत ताकतवर था और जाग चुका था। अंततः गुरू ने घरवालोँ से माफी माँगी और किसी अन्य से इलाज कराने को कहा। शाम को डॉ साहब घर आये और सब जान कर उनका पारा सातवेँ आसमान पर पहुँच गया। घर वालोँ को बहुत भला बुरा कहा और बोले की बीमारी का असर दिमाग पर हो गया है। इस बीच कई सिद्ध तांत्रिक आये पर कुछ न कर सके उनमेँ ही किसी ने बनारस के एक बड़े तांत्रिक का पता दिया। घरवालोँ ने उसे बुलवाया और पास ही एक होटल मेँ रूकने का प्रबँध किया।डॉ साहब के जाने के बाद वो आया और काम शुरू किया, घर बाँधा, दिशा बाँधी मौजूद लोगोँ को सुरक्षित कर क्रिया शुरु की तो लड़की बेचैन हो उठी, जल के छीँटे दिये और अपनी शक्ति से लड़की या कहेँ कि शैतान को मजबूर कर प्रश्न पूछे तब उसने बताया कि "मैँ एक प्रेत हूँ , स्कूल से लौटते वक्त इसने एक चौराहे को पार किया जहाँ किसी ने मुझे कुछ सामग्री मेँ उतार कर रखा था, ये उस सामग्री पर पैर रखते हुए आई और वहाँ पड़े गुलाब के फूल को उठा लाई तब मैँ इस पर सवार हो गया"। लड़की को छोड़ने की बात कहने पर बोला "ये बहुत सुँदर है इसे नहीँ छोड़ूँगा और मैँ इसे साथ ले कर ही जाऊँगा"। ताँत्रिक ने और अधिक मंत्र पढ़े तो लड़की बेहोश हो गयी। उसने वादा किया कि 5 दिनोँ मेँ लड़की प्रेत से मुक्त हो पहले जैसी हो जाएगी। अगले दिन फिर यही कार्यक्रम चला पर प्रेत भी बड़ा ढीठ था, नहीँ माना और लड़की ले जाने की बात कहता रहा। 
तीसरे दिन ये चल ही रहा था कि किसी ने डॉ साहब को खबर कर दी और वे अचानक धमक पड़े। ताँत्रिक को देख बहुत लाल पीले हुए और उसका बहुत अपमान किया। ताँत्रिक ने समझाने की बहुत कोशिश की पर वे नहीँ माने और दिमागी पीड़ा बताते रहे और ताँत्रिक पर बँदूक तान दी। प्रेत से जीत रहा ताँत्रिक डॉ से हार कर चला गया और बोला "बहुत पछताओगे, बेटी खो दोगे"। प्रेत हँस रहा था, डॉ साहब ने लड़की को सुलाने के लिए इंजेक्शन लगाया तो प्रेत बोला "डॉ. अब तेरी कोई दवा असर नहीँ करेगी तूने आखिरी मौका खो दिया। आने वाली अमावस को सुबह साढ़े दस बजे मैँ तेरी बेटी को ले जाऊँगा"। घर के लोगोँ ने ताँत्रिक को बुलाना चाहा पर जिद्दी डॉ के आगे किसी की न चली। अमावस नजदीक आती जा रही थी डॉ साहब ने दिल्ली आगरा तक के बड़े बड़े 10-12 विशेषज्ञ बुलवा लिए पर कुछ काम न आया। प्रेत के बताए अनुसार अमावस के दिन ठीक साढ़े दस बजे प्रेत ने जोर का ठहाका लगाया और बोला अब "मैँ जा रहा हूँ तेरी बेटी को लेकर, आखिरी बार देख ले" फिर बेटी निढाल हो गयी। 10- 12 डाक्टरोँ, परिवार और करीबी पड़ोसियोँ से भरे कमरे मेँ बिस्तर पर उसका शरीर पड़ा था, और प्रेत बेटी को ले जा चुका था।

Kanakdhara Stotram


अंग हरे पुलकभूषणमाश्रयंती भृंगागनेव मुकुलाभरणं तमालम |
अंगीकृताखिलविभूतिर पांग लीलामांगल्यदास्तु मम मंगदेवताया || १ ||

मुग्धा मुहुर्विदधाति वदने मुरारेः प्रेमत्रपाप्रणिहितानि गतागतानि |
... माला दुशोर्मधुकरीय महोत्पले यासा में श्रियं दिशतु सागरसंभवायाः || २ ||

विश्वासमरेन्द्रपदविभ्रमदानदक्ष , मानन्दहेतुरधिकं मधुविद्विषो पि |
इषन्निषीदतु मयी क्षणमीक्षर्णामिन्दीवरोदरसहोदरमिन्दिरायाः || ३ ||

आमीलिताक्षमधिगम्य मुदा मुकुन्दमानन्दकन्मनिमेषमनंगतन्त्रम |
आकेकरस्थितिकनीकिमपक्ष्म नेत्रंभूत्यै भवेन्मम भुजंगशयांगनायाः || ४ ||

बाह्यंतरे मधुजितः श्रितकौस्तुभे याहारावलीव हरीनिलमयी विभाति |
कामप्रदा भागवतोपी कटाक्ष मालाकल्याणमावहतु मे कमलालायायाः || ५ ||

कालाम्बुदालितलिसोरसी कैटमारेधरिधरे स्फुरति या तु तडंग दन्यै |
मातुः समस्तजगताम महनीयमूर्ति र्भद्राणि मे दिशतु भार्गवनन्दनायाः || ६ ||

प्राप्तम पदं प्रथमतः किल यत्प्रभावानमांगल्यभाजि मधुमाथिनी मन्मथेन |
मययापतेत्तदिह मन्थन मीक्षर्णामन्दालसम  मकरालयकन्यकायाः || ७ ||

दाद दयानुपवनो द्रविणाम्बुधारामस्मिन्न वि किंधनविहंगशिशौ विपाणे |
दुष्कर्मधर्म मापनीय चिराय दूरंनारायणप्रगणयिनीनयनाम्बुवाहः || ८ ||

इष्ट विशिष्टमतयोपी यया दयार्द्रदुष्टया त्रिविष्टपपदं सुलभं लर्भते |
दृष्टिः प्रहष्टकमलोदरदीप्तिरीष्टांपुष्टि कृपीष्ट मम पुष्करविष्टरायाः || ९ ||

गीर्तेवतेती गरुड़ध्वजभामिनीतिशाकम्भरीति शशिशेखरवल्लभेति |
सृष्टिस्थितिप्रलयकेलिषु संस्थितायैतस्यै नमास्त्रिभुवनैकगुरोस्तरुन्यै || १० ||

क्ष्फत्यै नमोस्तु शुभकर्मफलप्रसूत्यैरत्यै नमोस्तु रमणीयगुणार्णवायै |
शक्त्यै नमोस्तु शतपनिकेतनायैपुष्ट्यै नमोस्तु पुरुषोत्तम वल्लभायै || ११ ||

नमोस्तु नालीकनिभान्नायैनमोस्तु दुग्धोदधिजन्म भूत्यै |
नमोस्तु सोमामृतसोदरायै नमोस्तु नारायणवल्लभायै || १२ |

सम्पत्कराणि सकलेन्द्रियनन्दनानिसाम्राज्यदान विभवानि सरोरुहाक्षि |
त्वद्वन्द्वनानि दुरिताहरणोद्यतानी मामेव मातरनिशं कलयन्तु नान्यम || १३ ||

यत्कटाक्ष समुपासनाविधिःसेवकस्य सकलार्थ सम्पदः |
संतनोति वचनांगमानसैस्त्वां मुरारीहृदयेश्वरीं भजे || १४ ||

सरसीजनिलये सरोजहस्तेधवलतमांशु -कगंधमाल्य शोभे |
भगवती हरिवल्लभे मनोज्ञेत्रिभुवन भूतिकरि प्रसीद मह्यं || १५ ||

दिग्धस्तिभिः कनककुम्भमुखावसृष्टस्वर्वाहिनीतिमलाचरूजलप्तुतांगम |
प्रातर्नमामि जगताम जननीमशेषलोकाधिनाथ गृहिणीम मृताब्धिपुत्रिम || १६ ||

कमले कमलाक्षवल्लभेत्वम्करुणापूरतरंगितैपरपाडयै |
अवलोकय ममाकिंचनानांप्रथमं पात्रमकृत्रिमं दयायाः || १७ ||

स्तुवन्ति ये स्तुतिभिरमू भिरन्वहंत्रयोमयीं त्रिभुवनमातरम रमाम |
गुणाधिका गुरुतरभाग्यभामिनीभवन्ति ते भुवि बुधभाविताशयाः || १८ ||