आठ अंक वाले जातक तपस्वी व परोपकारी होते हैं


ज्योतिष विद्याओं में अंक विद्या का भी अपना अलग और विशिष्ट महत्व है। जिसके द्वारा हम थोड़े समय में ही प्रशन कर्ता का स्पष्ट उत्तर दे सकते हैं। अंक विद्या में आठ का अंक शनि को प्राप्त हुआ है। शनि परम तपस्वी और न्याय का कारक माना जाता है। इसकी विशेषता पुराणों में प्रतिपादित है। आपका जिस तारीख को जन्म हुआ है। गणना करिये और अगर योग आठ आये तो आपका अंकाधिपति शनिश्चर ही होगा। जैसे 8,17,26 तारीख आदि यथा-17=1+7= 8,26=2+6=8.
अंक आठ वाले जातक धीरे-धीरे उन्नति करते हैं और उनको सफलता देर से ही मिल पाती है। परिश्रम बहुत करना पड़ता है, लेकिन जितना परिश्रम किया जाता है, उतना फल नहीं मिल पाता है। जातक वकील और न्यायाधीश तक बन जाते हैं और लोहा, पत्थर आदि के व्यवसाय से भी जीवन यापन करते हैं। फिर भी हमेशा दिमाग अशांत ही रहता है, वह परिवार से भी अलग हो जाता है और दाम्पत्य जीवन में भी परेशानियां आती है। अत: आठ अंक वाले व्यक्तियों को प्रथम शनि के विधिवत बीज मंत्र का जाप करना चाहिए। उसके बाद साढ़े पांच रत्ती का नीलम धारण करना चाहिए। ऐसा करने से जातक हर क्षेत्र में उन्नति करता हुआ, अपने लक्ष्य को शीघ्र ही प्राप्त करता है और जीवन में तप भी कर सकेगा। जिसके फलस्वरूप जातक का यह लोक और परलोक सार्थक होंगे। शनि प्रधान जातक तपस्वी और परोपकारी होता है, वह न्यायवान, विचारवान, विद्वान, बुद्धि कुशाग्र और शांत स्वभाव का होता है। वह कठिन से कठिन परिस्थितियों में अपने को जिंदा रख सकता है। जातक को लोहा से जुड़े व्यवसायों में अधिक लाभ होता है। शनि प्रधान जातकों की अन्तर्भावना को कोई जल्दी पहचान नहीं पाता है। जातक के अंदर मानव परीक्षक के गुण विद्यमान होते हैं। शनि की गिरफ्त में आया व्यक्ति चालाकी, आलसी, धीरे-धीरे काम करने वाला, शरीर में ठंडक अधिक होने से रोगी, आलसी होने के कारण बात-बात में तर्क करने वाला और अपने को दंड से बचाने के लिए मधुर भाषी होता है।
ऐसे व्यकित का दांपत्य जीवन सामान्य होता है। अधिक परिश्रम करने के बाद भी धन और धान्य कम ही होता है। वैसे व्यक्ति नहीं तो समय से सोते हैं और नहीं समय से जागते हैं। हमेशा उनके दिमाग में चिंता घुसी रहती है। वे लोहा, स्टील, मशीनरी, ठेका, बीमा, पुराने वस्तुओं का व्यापार या राज कार्यों के अन्दर अपनी कार्य करके अपनी जीविका चलाते हैं। शनि प्रधान जातक में कुछ कमियां होती हैं, जैसे वे नये कपड़े पहनेंगे तो जूते उनके पुराने होंगे, हर बात में शंका करने लगेगे, अपनी आदत के अनुसार हठ बहुत करेंगे, अधिकतर जातकों के विचार पुराने होते हैं। उनके सामने जो भी परेशानी होती है सबके सामने उसे उजागर करने में उनको कोई शर्म नहीं आती है। शनि प्रधान जातक अक्सर अपने भाई और बांधवों से अपने विचार विपरीत रखते हैं, धन का हमेशा उनके पास अभाव ही रहता है, रोग उनके शरीर में मानो हमेशा ही पनपते रहते हैं, आलसी होने के कारण भाग्य की गाड़ी आती है और चली जाती है। उनको पहचान ही नहीं होती है, जो भी धन पिता के द्वारा दिया जाता है वह अधिकतर मामलों में अपव्यय ही कर दिया जाता है। अपने मित्रों से विरोध रहता है और अपनी माता के सुख से भी अधिकतर जातक वंचित रहता है।

कोई टिप्पणी नहीं: