दांतों की करे बेहतर देखभाल करे ......!

अगर आप अपने दाँतो की अच्छे से देखभाल नहीं करते तो दाँतो एवं मसूडों में होने वाली बीमारियाँ आपके दाँतो को समय से पहले खत्म कर सकते हैं | कुछ बहुत ही साधारण से तरीकों से आपके दाँत आपके साथ बहुत लंबे समय तक रह सकते हैं |
 
 हम सबके मुंह में हमेशा लाखों बैक्टीरिया रहते हैं जिनका कि एक ही लक्ष्य होता है कि किसी तरह से कोई कड़ी सतह मिल जाए तो उस पर जाकर चिपक जाएँ और फिर एक बड़ा समूह बना लें| यह प्रक्रिया साल के ३६५ दिन, और चौबीसों घंटे हमारे मुंह में होती रहती है | इस प्रक्रिया को रोका नहीं जा सकता क्योंकि ये बैक्टीरिया हमारे शरीर का एक हिस्सा हैं | जब ये बेक्टीरिया कड़ी सतह यानी हमारे दाँतो पर चिपकते हैं तो एक अदृश्य सतह, जिसको कि प्लेक कहते हैं, हमारे दांतों के चारों ओर बना देते हैं | आपने शायद सुबह को उठकर अपने दाँतो पर जीभ फिराते हुए कभी उस प्लेक को महसूस भी किया हो | दाँतो की देखभाल करने का मुख्य उद्देश्य ब्रश या फ्लोस की सहायता से इसी प्लेक को साफ़ करना होता है |

* अपने दाँतो को दिन में कम से कम दो बार लगभग दो मिनट या इससे ज्यादा ब्रश करना चाहिए | ब्रश सभी दांतों के आगे पीछे सभी जगह करना चाहिए और जीभ को भी साफ़ रखना चाहिए | सोने से पहले ब्रश करना सबसे ज्यादा फायदेमंद रहता है | दिन में मुँह में रहने वाली राल भी हमारे दांतों को बचाती है जबकि रात में हमारा मुह सूखा रहता है और फंसा हुआ खाना उनको नुक्सान पहुंचाता है | अगर किसी कारण कभी आप रात में ब्रश न कर पाए तो आपको पानी से जोरदार कुल्ला जरूर करना चाहिए |

* हमारे दाँतो की सभी सतहो तक ब्रश नहीं पहुँच पाता | दो दांतों के बाच की जगह में फंसा खाना दांतों को बहुत ही नुक्सान पहुंचाता है इसको निकालने के लिए बहुत ही पतले धागे का इस्तेमाल किया जाता है जिसको फ्लोस करना कहते हैं | पुराने ज़माने में लोग खाना खाने के बाद दांत को कुरेदना अच्छा मानते थे | ऐसा करना दांतों के साथ मसूडो को भी बहुत फायदा पहुंचाता है |

* मुँह को स्वस्थ रखने के लिए जीभ को साफ़ करना भी उसी तरह जरूरी है जैसे दाँतो को साफ़ करना जबकि हम अक्सर जीभ की तरफ ध्यान नहीं देते | मुँह में बदबू, मसूडों या जीभ पर जमी मैल के कारण ही होती है | आपकी साफ़ जीभ आपके दाँतो और मसूडो को तो स्वस्थ रखती ही है साथ ही साथ ये आपकी साँस को भी ताजगी प्रदान करती है |
* स्नैकस खाने से जितना बच सकें बचना चाहिए क्यूंकि स्नैक्स में प्रयुक्त मसाले बहुत जल्दी ही दांतों में प्लेक को बनने में मदद करते हैं जिससे जल्दी ही दाँतो में कैविटी हो जाती है |

चॉकलेट खाने से बचना चाहिए | चीज़ और दूध स्वस्थ दांतों के लिए अच्छे होते हैं | मीठा कम खाना चाहिए | हरी सब्जियाँ खानी चाहियें | सोडा या जूस के स्थान पर पानी पीना चाहिए क्योंकि फलों के जूस में भी एसिड्स और शुगर होते हैं जोकि दांतों को नुक्सान पहुंचाते हैं |


* करीब 90 फीसदी लोगों को दांतों से जुड़ी कोईन कोई बीमारी या परेशानी होती है , लेकिन ज्यादातरलोग बहुत ज्यादा दिक्कत होने पर ही डेंटिस्ट के पास जाना पसंद करते हैं। इससे कई बार छोटी बीमारी सीरियस बनजाती है। अगर सही ढंग से साफ - सफाई के अलावा हर 6 महीने में रेग्युलर चेकअप कराते रहें तो दांतों कीज्यादातर बीमारियों को काफी हद तक सीरियस बनने रोका जा सकता है।


* दांतों में ठंडा - गरम लगना , कीड़ा लगना ( कैविटी ) , पायरिया ( मसूड़ों से खून आना ) , मुंह से बदबू आना और दांतों का बदरंग होना जैसी बीमारियां सबसे कॉमन हैं।


* ठंडा - गरम लगना


वजह :- दांत के टूटने , नींद में किटकिटाने , घिसने के बाद , मसूड़ों की जड़ें दिखने और दांतों में कीड़ा लगने पर ठंडा - गरम लगने लगता है। कई बार बेहद दबाव के साथ ब्रश करने से भी दांत घिस जाते हैं और दांत संवेदनशील बन जाते हैं।


बचाव :- ज्यादा दबाव से ब्रश न करें और दांत पीसने से बचें।


इलाज :- इलाज वजह के मुताबिक होता है। फिर भी आमतौर पर डॉक्टर इसके लिए मेडिकेटेड टूथपेस्ट की सलाह देते हैं , जैसे कि सेंसोडाइन , थर्मोसील रैपिड एक्शन , सेंसोफॉर्म , कोलगेटिव सेंसटिव आदि। बिना डॉक्टर की सलाह लिए भी इन्हें इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन दो - तीन महीने के बाद भी समस्या बनी रहे तो डॉक्टर को दिखाएं।
* दांत में कीड़ा लगना :-


वजह : -दांत में सूराख होने की वजह होती है , मुंह में बननेवाला एसिड। हमारे मुंह में आम तौर पर बैक्टीरिया रहते हैं। जब हम खाना खाते हैं तो खाने के बाद अगर हम कुल्ला या ब्रश न करें तो खाने के कुछ कण मुंह में रह जाते हैं। ऐसी सूरत में खाना खा चुकने के 20 मिनटों के अंदर ही बैक्टीरिया खाने के कणों खासकर मीठी या स्टार्च वाली चीजों को एसिड में बदल देते हैं। बैक्टीरिया वाला यह एसिड और मुंह की लार मिलकर एक चिपचिपा पदार्थ ( प्लाक ) बनाते हैं। यह कुछ दांतों पर चिपक जाता है। अगर काफी दिनों तक उन दांतों की ढंग से सफाई न हो तो यह प्लाक सख्त होकर टारटर बन जाता है और दांतों व मसूड़ों को खराब करने लगता है। प्लाक का बैक्टीरिया जब दांतों में सूराख ( कैविटी ) कर देता है तो इसे ही कीड़ा लगना ( कैरीज ) कहते हैं।


बचाव :- कीड़ा लगने से बचने का सबसे सही तरीका है कि रात को ब्रश करके सोएं। मीठी और स्टार्च आदि की चीजें कम खाएं और बार - बार न खाएं। मीठी चीजें खाने के बाद कुल्ला करें या ब्रश करें। दांतों की अच्छी तरह सफाई करें।


कैसे पहचानें :- अगर दांतों पर काले - भूरे धब्बे नजर आने लगें , खाना किसी दांत में फंसने लगे और ठंडा - गरम लगने लगे तो कैविटी हो सकती है। इस हालत में तुरंत डॉक्टर के पास जाएं। शुरुआत में ही ध्यान देने पर कैविटी बढ़ने से रुक जाती है।
* तुरंत राहत के लिए :- अगर दांत में दर्द हो रहा हो तो पैरासिटामोल , एस्प्रिन , इबो - प्रोफिन आदि ले सकते हैं। दवा न होने पर लौंग दाढ़ पर दबा सकते हैं या लौंग का तेल भी लगा सकते हैं। यह मसूड़ों के दर्द से राहत दिलाता है। इसके बाद डॉक्टर के पास जाकर फिलिंग कराएं।


फिलिंग क्यों जरूरी :-


फिलिंग न कराएं तो दांत में ठंडा - गरम और खट्टा - मीठा लगता रहेगा। फिर दांत में दर्द होने लगता है और पस बन जाती है। आगे जाकर रूट कनाल ट्रीटमंट की नौबत आ जाती है। यानी जितनी जल्दी फिलिंग कराएं , उतना अच्छा है।


फिलिंग कौन - कौन सी


टेंपरेरी फिलिंग :- यह उस वक्त करते हैं , जब दांत में काफी गहरी कैविटी हो। बाद में दर्द या सेंसटिविटी नहीं होने पर परमानेंट फिलिंग कर देते हैं। अगर दिक्कत होती है तो रूट कनाल या फिर दांत निकाला जाता है।


सिल्वर फिलिंग :- इसे एमैल्गम भी कहते हैं। इसमें सिल्वर , टिन , कॉपर को मरकरी के साथ मिलाकर मिक्सचर तैयार किया जाता है।


तरीका :- सबसे पहले कीड़े की सफाई और कैविटी कटिंग की जाती है। इसके बाद जिंक फॉस्फेट सीमेंट की लेयर लगाई जाती है ताकि फिलिंग में इस्तेमाल होनेवाली मरकरी जड़ तक पहुंचकर नुकसान न पहुंचाए। इसके बाद एमैल्गम भरा जाता है। फिलिंग कराने के एक घंटे बाद तक कुछ न खाएं। बाद में फिलिंग वाली दाढ़ के दूसरी तरफ से खा सकते हैं। 24 घंटे बाद फिलिंग वाले दांत से खा सकते हैं।


फायदे :- यह दूसरी फिलिंग्स से सस्ती और ज्यादा मजबूत होती है।


नुकसान :- यह ग्रे / ब्लैक होती है। देखने में खराब लगती है। इसे मरकरी से मिक्स किया जाता है। नॉर्वे और स्वीडन में इस अमैलगम पर बैन है। साथ ही , लीकेज होने के खतरे के अलावा कई बार इसमें जंग भी लग जाती है।


कंपोजिट फिलिंग :- इसे कॉस्मेटिक या टूथ कलर फिलिंग भी कहते हैं। इसे बॉन्डिंग टेक्निक और लाइट क्योर मैथड से तैयार किया जाता है।


*तरीका :- पहले कैविटी कटिंग की जाती है , फिर सरफेस को फॉस्फेरिक एसिड के साथ खुरदुरा किया जाता है। इससे सरफेस एरिया बढ़ने के अलावा मटीरियल अच्छी तरह सेट हो जाता है। इसके बाद मटीरियल भरा जाता है। छोटी - छोटी मात्रा में कई बार मटीरियल भरा जाता है। हर बार करीब 30 सेकंड तक एलईडी लाइट गन की नीली रोशनी से उसे पक्का किया जाता है। इसके बाद उभरी सतह को घिसकर शेप दी जाती है और पॉलिशिंग होती है। फिलिंग कराने के तुरंत बाद खा सकते हैं।


फायदे :- यह टूथ कलर की होती है। देखने में पता भी नहीं चलता कि फिलिंग की गई है। यह ज्यादा टिकाऊ होती है। अब नैनो तकनीक का मटीरियल आने से यह फिलिंग और भी बेहतर हो गई है।


नुकसान :- फिलिंग कराते हुए दांत सूखा होना चाहिए , वरना मटीरियल निकलने का डर होता है। बच्चों में यह फिलिंग नहीं की जाती। आमतौर पर उन्हीं दांतों में की जाती है , जिनसे खाना चबाते हैं।


जीआईसी फिलिंग :- इसका पूरा नाम ग्लास इनोमर सीमेंट फिलिंग है। यह ज्यादातर बच्चों में या बड़ों में कुछ सेंसेटिव दांतों में की जाती है। इसमें सिलिका होता है। यह हल्की होती है , इसलिए चबाने वाले दांतों में यह फिलिंग नहीं की जाती। फिलिंग कराने के एक घंटे बाद तक कुछ न खाना बेहतर रहता है।


तरीका :- यह सेल्फ क्योर और लाइट क्योर , दोनों तरीकों से लगाई जाती है।


फायदे :- इसमें मौजूद फ्लोराइड आगे कीड़ा लगने से रोकता है , इसलिए इसे प्रिवेंटिव फिलिंग भी कहा जाता है।


नुकसान :- यह होती तो सफेद ही है , पर दांतों के रंग से मैच न करने से देखने में अच्छी नहीं लगती और सभी दांतों में इसे नहीं भरा जाता। चबाने वाले और सामने वाले दांतों में इसके इस्तेमाल से बचा जाता है क्योंकि यह ज्यादा मजबूत नहीं होती। वैसे , अब जीआईसी फिलिंग में भी दांतों के रंग के शेड आने लगे हैं।


* कब निकल जाती है फिलिंग :-


जब कैविटी की शेप और साइज ठीक न हो


जब कैविटी काफी बड़ी हो


जब फिलिंग को पूरा सपोर्ट न मिला हो


जब सही मटीरियल और तकनीक इस्तेमाल न की गई हो


जब फिलिंग कराते हुए दांत सूखा न रहा हो , उसमें लार आ गई हो


जब दांत और फिलिंग के बीच गैप आने से माइक्रो लीकेज हो जाए


फिलिंग से जुड़े दो और जरूरी पहलू


1. फिलिंग कराने के बाद कई बार दांत में सेंसिटिविटी आ जाती है यानी उस दांत पर ठंडा या गर्म महसूस होने लगता है। लेकिन यह कुछ दिनों में ठीक न हो तो डॉक्टर को दिखाएं।


2. फिलिंग कराने के बाद कीड़ा बढ़ता नहीं है लेकिन कई बार थोड़ी - बहुत लीकेज हो सकती है तो कई बार फिलिंग के नीचे ही कीड़ा लग जाता है। ऐसे में अगर फिलिंग पुरानी हो गई है तो हर 6 महीने में चेक करानी चाहिए।


रूट कनाल :-


* जब कीड़ा काफी बढ़ जाता है , दांत में गहरा सूराख कर देता है और जड़ों तक इंफेक्शन फैल जाता है तो रूट कनाल किया जाता है। जिन टिश्यूज में इंफेक्शन हो गया है , उन्हें स्टरलाइज्ड करके दांत में एक मटीरियल भर दिया जाता है , ताकि वह बरकरार रहे। यानी दांत ऊपर से पहले जैसा ही रहता है और काम करता है , जबकि दांत की ब्लड सप्लाई काट देते हैं। इससे कोई नुकसान नहीं होता। हां , दांत में इंफेक्शन या किसी और बीमारी की आशंका खत्म हो जाती है। इस प्रक्रिया में अक्सर दांत के टूटने की आशंका बढ़ जाती है , इसलिए जरूरी है कि दांत पर क्राउन लगाया जाए। इससे दांत का फ्रेक्चर भी रुकता है , लुक भी पहले जैसा बना रहता है। कभी - कभी रूट कनाल फेल भी हो जाती है। उसमें पस पड़ जाती है , तब डॉक्टर तय करता है दांत निकालें या नहीं। ऐसी स्थिति में फिर से इलाज किया जाता है। इस पूरे प्रॉसेस में चार - पांच सिटिंग लगती हैं।


* सांस में बदबू :-


* 95 फीसदी मामलों में मसूड़ों और दांतों की ढंग से सफाई न होने और उनमें सड़न व बीमारी होने पर मुंह से बदबू आती है। कुछ मामलों में पेट खराब होना या मुंह की लार का गाढ़ा होना भी इसकी वजह होती है। प्याज और लहसुन आदि खाने से भी मुंह से बदबू आने लगती है।


इलाज :- लौंग , इलायची चबाने से इससे छुटकारा मिल जाता है। थोड़ी देर तक शुगर - फ्री च्यूइंगगम चबाने से मुंह की बदबू के अलावा दांतों में फंसा कचरा निकल जाता है और मसाज भी हो जाती है। इसके लिए बाजार में माउथवॉश भी मिलते हैं।


पायरिया :-


* मुंह से बदबू आने लगे , मसूड़ों में सूजन और खून निकलने लगे और चबाते हुए दर्द होने लगे तो पायरिया हो सकता है। पायरिया होने पर दांत के पीछे सफेद - पीले रंग की परत बन जाती है। कई बार हड्डी गल जाती है और दांत हिलने लगता है।पायरिया की मूल वजह दांतों की ढंग से सफाई न करना है।


इलाज -: पायरिया का सर्जिकल और नॉन सर्जिकल दोनों तरह से इलाज होता है। शुरू में इलाज कराने से सर्जरी की नौबत नहीं आती। क्लीनिंग , डीप क्लीनिंग ( मसूड़ों के नीचे ) और फ्लैप सर्जरी से पायरिया का ट्रीटमंट होता है।


दांत निकालना कब जरूरी :-


* दांत अगर पूरा खोखला हो गया हो , भयंकर इन्फेक्शन हो गया हो , मसूड़ों की बीमारी से दांत हिल गए हों या बीमारी दांतों की जड़ तक पहुंच गई हो तो दांत निकालना जरूरी हो जाता है।


ब्रश करने का सही तरीका :-


* यों तो हर बार खाने के बाद ब्रश करना चाहिए लेकिन ऐसा हो नहीं पाता। ऐसे में दिन में कम - से - कम दो बार ब्रश जरूर करें और हर बार खाने के बाद कुल्ला करें। दांतों को तीन - चार मिनट ब्रश करना चाहिए। कई लोग दांतों को बर्तन की तरह मांजते हैं , जोकि गलत है। इससे दांत घिस जाते हैं। आमतौर पर लोग जिस तरह दांत साफ करते हैं , उससे 60-70 फीसदी ही सफाई हो पाती है।


* दांतों को हमेशा सॉफ्ट ब्रश से हल्के दबाव से धीरे - धीरे साफ करें। मुंह में एक तरफ से ब्रशिंग शुरू कर दूसरी तरफ जाएं। बारी - बारी से हर दांत को साफ करें। ऊपर के दांतों को नीचे की ओर और नीचे के दांतों को ऊपर की ओर ब्रश करें। दांतों के बीच में फंसे कणों को फ्लॉस ( प्लास्टिक का धागा ) से निकालें। इसमें 7-8 मिनट लगते हैं और यह अपने देश में ज्यादा कॉमन नहीं है। दांतों और मसूड़ों के जोड़ों की सफाई भी ढंग से करें। उंगली या ब्रश से धीरे - धीरे मसूड़ों की मालिश करने से वे मजबूत होते हैं।


जीभ की सफाई जरूरी :- जीभ को टंग क्लीनर और ब्रश , दोनों से साफ किया जा सकता है। टंग क्लीनर का इस्तेमाल इस तरह करें कि खून न निकले।


कैसा ब्रश सही :- ब्रश सॉफ्ट और आगे से पतला होना चाहिए। करीब दो - तीन महीने में या फिर जब ब्रसल्स फैल जाएं , तो ब्रश बदल देना चाहिए।


टूथपेस्ट की भूमिका :- दांतों की सफाई में टूथपेस्ट की ज्यादा भूमिका नहीं होती। यह एक मीडियम है , जो लुब्रिकेशन , फॉमिंग और फ्रेशनिंग का काम करता है। असली एक्शन ब्रश करता है। लेकिन फिर भी अगर टूथपेस्ट का इस्तेमाल करें , तो उसमें फ्लॉराइड होना चाहिए। यह दांतों में कीड़ा लगने से बचाता है। पिपरमिंट वगैरह से ताजगी का अहसास होता है। टूथपेस्ट मटर के दाने जितना लेना काफी होता है।


पाउडर और मंजन :- टूथपाउडर और मंजन के इस्तेमाल से बचें। टूथपाउडर बेशक महीन दिखता है लेकिन काफी खुरदुरा होता है। टूथपाउडर करें तो उंगली से नहीं , बल्कि ब्रश से। मंजन इनेमल को घिस देता है।


दातुन -: नीम के दातुन में बीमारियों से लड़ने की क्षमता होती है लेकिन यह दांतों को पूरी तरह साफ नहीं कर पाता। बेहतर विकल्प ब्रश ही है। दातुन करनी ही हो तो पहले उसे अच्छी तरह चबाते रहें। जब दातुन का अगला हिस्सा नरम हो जाए तो फिर उसमें दांत धीरे - धीरे साफ करें। सख्त दातुन दांतों पर जोर - जोर से रगड़ने से दांत घिस जाते हैं।


माउथवॉश :- मुंह में अच्छी खुशबू का अहसास कराता है। हाइजीन के लिहाज से अच्छा है लेकिन इसका ज्यादा इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।


* नींद में दांत पीसना :-


वजह :- गुस्सा , तनाव और आदत की वजह से कई लोग नींद में दांत पीसते हैं। इससे आगे जाकर दांत घिस जाते हैं।


बचाव :- नाइटगार्ड यूज करना चाहिए।


स्केलिंग और पॉलिशिंग :-


* दांतों पर जमा गंदगी को साफ करने के लिए स्केलिंग और फिर पॉलिशिंग की जाती है। यह हाथ और अल्ट्रासाउंड मशीन दोनों तरीकों से की जाती है। चाय - कॉफी , पान और तंबाकू आदि खाने से बदरंग हुए दांतों को सफेद करने के लिए ब्लीचिंग की जाती है। दांतों की सफेदी करीब डेढ़ - दो साल टिकती है और उसके बाद दोबारा ब्लीचिंग की जरूरत पड़ सकती है।


चेकअप कब कराएं :-


* अगर कोई परेशानी नहीं है तो कैविटी के लिए अलग से चेकअप कराने की जरूरत नहीं है लेकिन हर छह महीने में एक बार दांतों की पूरी जांच करानी चाहिए।


मुस्कुराते रहें :-


* मुस्कराहट और अच्छे व खूबसूरत दांतों के बीच दोतरफा संबंध है। सुंदर दांतों से जहां मुस्कराहट अच्छी होती है , वहीं मुस्कराहट से दांत अच्छे बनते हैं। तनाव दांत पीसने की वजह बनता है , जिससे दांत बिगड़ जाते हैं। तनाव से एसिड भी बनता है , जो दांतों को नुकसान पहुंचाता है।


बच्चों के दांतों की देखभाल


छोटे बच्चों के मुंह में दूध की बोतल लगाकर न सुलाएं।


चॉकलेट और च्यूइंगम न खिलाएं। खाएं भी तो तुरंत कुल्ला करें।


बच्चे को अंगूठा न चूसने दें। इससे दांत टेढ़े - मेढ़े हो जाते हैं।


डेढ़ साल की उम्र से ही अच्छी तरह ब्रशिंग की आदत डालें।


छह साल से कम उम्र के बच्चों को फ्लोराइड वाला टूथपेस्ट न दें।

इन उपायों का गर्भनिरोधक के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं....!





वैसे तो गर्भनिरोधकों के तमाम विकल्प बाजार में मौजूद हैं लेकिन अगर आप इनके केमिकल या साइड एफेक्ट से दूरी रखना चाहते हैं या फिर इन प्रचलित तरीकों में यकीन नहीं रखते हैं तो आयुर्वेद में आपके लिए कु‌छ घरेलू उपाय भी हैं।

* आयुर्वेद पर यकीन रखते हैं तो इन उपायों का गर्भनिरोधक के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं। वैसे तो इनके साइड एफेक्ट नहीं है लेकिन इनका इस्तेमाल आप किसी अनुभवी आयुर्वेदिक डॉक्टर के परामर्श से करें तो प्राकृतिक और सुरक्षित तौर पर गर्भनिरोध और बेफिक्र सेक्स लाइफ आसान हो सकेगी।

मासिक धर्म के पश्‍चात स्‍नान करने के बाद एरंड के बीज की गिरी छीलकर खाने से गर्भ नहीं ठहरता है। एक गिरी निगलने पर एक वर्ष, दो गिरी निगलने पर दो वर्ष व तीन गिरी निगलने पर तीन वर्ष तक बच्‍चे पैदा नहीं होंगे। बच्‍चे पैदा करने की इच्‍छा हो तो गिरी खाना बंद कर दें। एक वर्ष बाद पुन: गर्भधारण करने की क्षमता उत्‍पन्‍न हो जाती है। किसी भी हाल में एक साथ तीन से अधिक गिरी न खाएं। यह नुकसानदायक हो सकता है।

पीरियड के बाद लहसुन की दो कलियां छीलकर निगल जाएं तो गर्भ नहीं ठहरेगा।

पीपल, सुहागा व बायबिडंग को बराबर-बराबर लेकर पीस लें। जिस दिन पीरियड आरंभ हो उस दिन से सात दिनों तक छह ग्राम चूर्ण पानी से खाएं, एक वर्ष तक गर्म नहीं ठहरेगा।

तालीसपत्र व गेरू को 25 ग्राम लेकर चार दिनों तक ठंडे पानी से पीने से स्‍थाई बांझपन आ जाती है।

सीताफल का बीज पीसकर योनी में मलने से गर्भ नहीं ठहरेगा और इससे गर्भाशय की सफाई भी हो जाती है ।

पीरियड बंद होने के बाद एक कप तुलसी के पत्‍ते लेकर काढ़ा बनाएं और तीन दिन तक लगातार पीएं। इससे गर्भ भी नहीं ठहरेगा और कोई नुकसान भी नहीं होगा।

हल्‍दी की गांठ पीसकर उसे छान ले। छह ग्राम पाउडर पानी के साथ खाएं। इसे पूरे पीरियड के दौरान खाएं तो गर्भ नहीं ठहरेगा।

पीरियड के पांचवें दिन करेले का रस पीने से गर्भ नहीं ठहरता है।

संभोग के दौरान नीम के तेल में रूई का फाहा भिंगोकर योनी में रखने से गर्भ ठहरने की संभावना नहीं रहती है।

* कैस्टर यानी अरंडी के बीज को फोड़ें और इनमें मौजूद सफेद बीज को निकालें। सेक्स के 72 घंटे के भीतर महिलाएं इसका सेवन करें तो यह आई-पिल की तरह ही गर्भधारण रोक सकता है। महिलाएं इसका सेवन पीरियड्स के तीन दिनों तक करें तो एक महीने तक इसका प्रभाव रहेगा।

* त‌िल के तेल में सेंधा नमक का टुकड़ा डुबोएं और सेक्स के बाद इसे महिलाएं अपने प्राइवेट पार्ट पर कम से कम दो मिनट तक रखें। इससे वीर्य गर्भाशय में पहुंचते ही नष्ट हो जाएगा। महिलाएं सेक्स के बाद प्राइवेट पार्ट को गुनगुने पानी और सेंधा नमक से भी साफ कर सकती हैं। इससे भी गर्भ नहीं ठहरेगा।


* मासिक धर्म से शुद्ध होने पर (पांचवें दिन से) चमेली की एक कली (चमेली का फूल, जो खिला न हो) पानी के साथ रोज
लगातार तीन दिन तक निगलने से एक वर्ष तक गर्भनिरोधक का काम करेगा।

* सूखे पुदीने के पत्ते का पाउडर बनाएं और स्टोर कर लें। सेक्स के पांच मिनट के बाद एक ग्लास गुनगुने पानी के साथ एक चम्मच पाउडर का सेवन करें। महिलाओं के लिए यह नैचुरल कंट्रासेप्टिव दवा का काम करेगा।

* गुड़हल के फूल का पेस्ट बनाएं इसमें स्टार्च मिलाएं। पीरियड्स के शुरुआती तीन दिनों तक इसका सेवन कंट्रासेप्टिव की तरह ही काम करेगा। संभोग के समय प्‍याज का रस योनी में रखने पर शुक्राणु बेसर हो जाते हैं।

 संभोग के समय प्‍याज का रस योनी में रखने पर शुक्राणु बेसर हो जाते हैं।

* आंवला, रसनजनम और हरितकारी को समान मात्रा में लेकर इनका पाउडर बनाएं और स्टोर करें। ये औषध‌ियां क‌िसी भी आयुर्वेदिक स्टोर पर म‌िल जाएंगी। महिलाएं इनका सेवन पीरियड्स के चौथे दिन से 16वें दिन तक करें तो यह गर्भनिरोधक गोलियों की तरह ही असरदार होता है।


* यदि आप गर्भ निरोधक प्रयोग नहीं करना चाहते या गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन नहीं करना चाहते हों तो चावल धुले पानी में चावल के पौधे की जड़ पीसकर छान लें और इसमें शहद मिलाकर पिला दें। यह हानिरहित सुरक्षित गर्भनिरोधक उपाय है।

सांप काटे का एक कारगर इलाज...!




* एक medicine आप चाहें तो हमेशा अपने घर मे रख सकते हैं बहुत सस्ती है होमियोपेथी  मे आती है ! 

* उसका नाम है NAJA (N A J A ) ! homeopathy medicine है किसी भी homeopathy shop मे आपको मिल जाएगी ! और इसकी potency है 200 ! आप दुकान पर जाकर कहें NAJA 200 देदो ! तो दुकानदार आपको दे देगा ! 

* ये 5 मिलीलीटर आप घर मे खरीद कर रख लीजिएगा 100 लोगो की जान इससे बच जाएगी ! और इसकी कीमत सिर्फ पाँच रुपए है ! इसकी बोतल भी आती है 100 मिलीग्राम की 70 से 80 रुपए की उससे आप कम से कम 10000 लोगो की जान बचा सकते हैं जिनको साँप ने काटा है !

* ये जो medicine है NAJA ये दुनिया के सबसे खतरनाक साँप का ही poison है जिसको कहते है क्रैक ! इस साँप का poison दुनिया मे सबसे खराब माना जाता है ! इसके बारे मे कहते है अगर इसने किसी को काटा तो उसे भगवान ही बचा सकता है ! medicine भी वहाँ काम नहीं करती उसी का ये poison है लेकिन delusion form मे है तो घबराने की कोई बात नहीं... ! 


* आयुर्वेद का सिद्धांत आप जानते है लोहा लोहे को काटता है तो जब जहर चला जाता है शरीर के अंदर तो दूसरे साँप का जहर ही काम आता है !

* तो ये NAJA 200 आप घर मे रख लीजिये !अब देनी कैसे है रोगी को वो आप जान लीजिये !


* इसे 1 बूंद उसकी जीभ पर रखे और 10 मिनट बाद फिर 1 बूंद रखे और फिर 10 मिनट बाद 1 बूंद रखे ...!! 3 बार डाल के छोड़ दीजिये !बस इतना काफी है !

* ये दवा रोगी की जिंदगी को हमेशा हमेशा के लिए बचा लेगी ! और साँप काटने के एलोपेथी मे जो injection है वो आम अस्तप्तालों मे नहीं मिल पाते ! डाक्टर आपको कहेगा इस अस्तपाताल मे ले जाओ उसमे ले जाओ आदि आदि !!

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* ये जानकारी आप हमेशा याद रखे पता नहीं कब काम आ जाए हो सकता है आपके ही जीवन मे काम आ जाए ! या पड़ोसी के जीवन मे या किसी रिश्तेदार के काम आ जाए! तो first aid के लिए injection की सुई काटने वाला तरीका और ये NAJA 200 hoeopathy दवा... ! 


* 10 - 10 मिनट बाद 1 - 1 बूंद तीन बार रोगी की जान बचा सकती है !!

क्या है थायराइड की वजह ....!



थायराइड मानव शरीर मे पाए जाने वाले एंडोक्राइन ग्लैंड में से एक है। थायरायड ग्रंथि गर्दन में श्वास नली के ऊपर एवं स्वर यन्त्र के दोनों ओर दो भागों में बनी होती है। इसका आकार तितली जैसा होता है। यह थाइराक्सिन नामक हार्मोन बनाती है जिससे शरीर के ऊर्जा क्षय, प्रोटीन उत्पादन एवं अन्य हार्मोन के प्रति होने वाली संवेदनशीलता नियंत्रित होती है।
यह ग्रंथि शरीर के मेटाबॉल्जिम को नियंत्रण करती है यानि जो भोजन हम खाते हैं यह उसे उर्जा में बदलने का काम करती है।
* इसके अलावा यह हृदय, मांसपेशियों, हड्डियों व कोलेस्ट्रोल को भी प्रभावित करती है।
*आमतौर पर शुरुआती दौर में थायराइड के किसी भी लक्षण का पता आसानी से नहीं चल पाता, क्योंकि गर्दन में छोटी सी गांठ सामान्य ही मान ली जाती है। और जब तक इसे गंभीरता से लिया जाता है, तब तक यह भयानक रूप ले लेता है।
*आखिर क्या कारण हो सकते है जिनसे थायराइड होता है।
* थायरायडिस- यह सिर्फ एक बढ़ा हुआ थायराइड ग्रंथि (घेंघा) है, जिसमें थायराइड हार्मोन बनाने की क्षमता कम हो जाती है।
* इसोफ्लावोन गहन सोया प्रोटीन, कैप्सूल, और पाउडर के रूप में सोया उत्पादों का जरूरत से ज्यादा प्रयोग भी थायराइड होने के कारण हो सकते है।
* कई बार कुछ दवाओं के प्रतिकूल प्रभाव भी थायराइड की वजह होते हैं।
* थायराइट की समस्या पिट्यूटरी ग्रंथि के कारण भी होती है क्यों कि यह थायरायड ग्रंथि हार्मोन को उत्पादन करने के संकेत नहीं दे पाती।
* भोजन में आयोडीन की कमी या ज्यादा इस्तेमाल भी थायराइड की समस्या पैदा करता है।
* सिर, गर्दन और चेस्ट की विकिरण थैरेपी के कारण या टोंसिल्स, लिम्फ नोड्स, थाइमस ग्रंथि की समस्या या मुंहासे के लिए विकिरण उपचार के कारण।
* जब तनाव का स्तर बढ़ता है तो इसका सबसे ज्यादा असर हमारी थायरायड ग्रंथि पर पड़ता है। यह ग्रंथि हार्मोन के स्राव को बढ़ा देती है।
* यदि आप के परिवार में किसी को थायराइड की समस्या है तो आपको थायराइड होने की संभावना ज्यादा रहती है। यह थायराइड का सबसे अहम कारण है।
* ग्रेव्स रोग थायराइड का सबसे बड़ा कारण है। इसमें थायरायड ग्रंथि से थायरायड हार्मोन का स्राव बहुत अधिक बढ़ जाता है। ग्रेव्स रोग ज्यादातर 20और 40 की उम्र के बीच की महिलाओं को प्रभावित करता है, क्योंकि ग्रेव्स रोग आनुवंशिक कारकों से संबंधित वंशानुगत विकार है, इसलिए थाइराइड रोग एक ही परिवार में कई लोगों को प्रभावित कर सकता है।
* थायराइड का अगला कारण है गर्भावस्था, जिसमें प्रसवोत्तर अवधि भी शामिल है। गर्भावस्था एक स्त्री के जीवन में ऐसा समय होता है जब उसके पूरे शरीर में बड़े पैमाने पर परिवर्तन होता है, और वह तनाव ग्रस्त रहती है।
* रजोनिवृत्ति भी थायराइड का कारण है क्योंकि रजोनिवृत्ति के समय एक महिला में कई प्रकार के हार्मोनल परिवर्तन होते है। जो कई बार थायराइड की वजह बनती है।
*थायराइड के लक्षण:--
कब्ज- थाइराइड होने पर कब्ज की समस्या शुरू हो जाती है। खाना पचाने में दिक्कत होती है। साथ ही खाना आसानी से गले से नीचे नहीं उतरता। शरीर के वजन पर भी असर पड़ता है।
हाथ-पैर ठंडे रहना- थाइराइड होने पर आदमी के हाथ पैर हमेशा ठंडे रहते है। मानव शरीर का तापमान सामान्य यानी 98.4 डिग्री फॉरनहाइट (37 डिग्री सेल्सियस) होता है, लेकिन फिर भी उसका शरीर और हाथ-पैर ठंडे रहते हैं।
प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होना- थाइराइड होने पर शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कम़जोर हो जाती है। इम्यून सिस्टम कमजोर होने के चलते उसे कई बीमारियां लगी रहती हैं।
थकान– थाइराइड की समस्या से ग्रस्त आदमी को जल्द थकान होने लगती है। उसका शरीर सुस्त रहता है। वह आलसी हो जाता है और शरीर की ऊर्जा समाप्त होने लगती है।
त्वचा का सूखना या ड्राई होना– थाइराइड से ग्रस्त व्यक्ति की त्वचा सूखने लगती है। त्वचा में रूखापन आ जाता है। त्वचा के ऊपरी हिस्से के सेल्स की क्षति होने लगती है जिसकी वजह से त्वचा रूखी-रूखी हो जाती है।
जुकाम होना– थाइराइड होने पर आदमी को जुकाम होने लगता है। यह नार्मल जुकाम से अलग होता है और ठीक नहीं होता है।
डिप्रेशन- थाइराइड की समस्या होने पर आदमी हमेशा डिप्रेशन में रहने लगता है। उसका किसी भी काम में मन नहीं लगता है, दिमाग की सोचने और समझने की शक्ति कमजोर हो जाती है। याद्दाश्त भी कमजोर हो जाती है।
बाल झड़ना- थाइराइड होने पर आदमी के बाल झड़ने लगते हैं तथा गंजापन होने लगता है। साथ ही साथ उसके भौहों के बाल भी झड़ने लगते है।
मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द- मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द और साथ ही साथ कमजोरी का होना भी थायराइड की समस्या के लक्षण हो सकते है।
शारीरिक व मानसिक विकास- थाइराइड की समस्या होने पर शारीरिक व मानसिक विकास धीमा हो जाता है।
अगर आपको ऐसे कोई भी लक्षण दिखाई दे तो तुरन्त अपने डाक्टर से संपर्क करें आपको थाइराइड समस्या हो सकती है।
साथ ही आप ALOEVERA GEL (जूस) का सेवन करें….साथ ही तुलसी व गिलोय को खली पेट लेना शुरू करे लाभ होगा

बड़ी तोंद नहीं चाहते हैं तो नमक कम खाइए....!



बढ़ते मोटापे से देश में सभी परेशान हैं। जिसे देखो बाहर निकले पेट से परेशान है। पेट का बाहर निकल आना न सिर्फ भद्दा लगता है, बल्कि कई बीमारियों को न्यौता देने वाला भी साबित हो सकता है। लेकिन, अब आपको परेशान होने की जरूरत नहीं। वैज्ञानिकों ने इसका उपाय खोज लिया है। एक स्वास्थ्य विशेषज्ञ के अनुसार, प्रतिदिन अपने भोजन में नमक की मात्रा घटाकर और पोटैशियम से भरपूर फाइबर युक्त भोजन खाकर हम तोंद से बच सकते हैं।

* अमेरिका के वॉशिंगटन में डाइजेस्टिव सेंटर की स्थापना करने वाले गैस्ट्रोइंट्रोलॉजिस्ट रॉबिन चुटकन ने अपनी नई पुस्तक में कहा है कि पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में तोंद निकलने की शिकायत अधिक होती है। इसका मुख्य कारण यह है कि औरतों के आंत की लंबाई अधिक होती है।

* वेबसाइट फीमेलफस्र्ट डॉट को डॉट यूके के अनुसार, चुटकन ने अपनी इस नई पुस्तक में बताया है कि महिलाओं एवं पुरुषों के पाचन तंत्र में कुछ मूल अंतर होते हैं। इसलिए पेट को निकलने से बचाने के लिए कुछ परहेज बरते जाने चाहिए।
नमक कम खाएंः भोजन में नमक का अधिक प्रयोग करने से भी पेट फूल सकता है। एक दिन में अधिकतम 1,500 मिलीग्राम नमक ही खाना चाहिए।

* अधिकतर रेशेयुक्त भोजन लेंः घुलनशील एवं अघुलनशील रेशेयुक्त भोजन की मिश्रित मात्रा का प्रयोग करना चुस्त-दुरुस्त एवं छरहरा रहने का सबसे अच्छा तरीका है। पेट के अत्यधिक भरे होने से बचें, क्योंकि इससे कब्ज होती है।

* पोटैशियम से भरपूर भोजन लेंः सोडियम चूंकि शरीर में जल के स्तर को बनाए रखता है, वहीं पोटैशियम अतिरिक्त जल से निजात दिलाने में मददगार होता है। केले और शकरकंद जैसे पोटैशियम से भरपूर खाद्य पदार्थ का सेवन करने से कमर के मध्य हिस्से को पतला करने में मदद मिलती है।

* शरीर में पानी की मात्रा बरकरार रखेंः पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करने से भोजन के रेशे अपना कार्य कहीं बेहतर तरीके से कर पाते हैं और कब्ज की शिकायत को दूर रखते हैं।

* पाचन के तनाव से बचेंः ऐसे खाद्य पदार्थों से दूर रहें जो पचने में मुश्किल हों, जैसे चीनी या वसायुक्त खाद्य पदार्थ।

* कृत्रिम मिठास वाले पदार्थों से बचेंः फ्लेवर्ड पेय पदार्थों, कम कार्बाेहाइड्रेट वाले एवं चीनी रहित खाद्य पदार्थों को हमारा शरीर आसानी से नहीं पचा पाता। बड़ी आंत में पाए जाने वाले जीवाणु उन्हें फर्मेंट करने की कोशिश करते हैं, जिसके कारण पेट में गैस बनती है और पेट फूल जाता है।

केले खाने के 10 फायदे है ....!



केला दिखने में भले ही एक साधारण फल लगे, लेकिन यह सेहत की दृष्टि से बहुत फायदेमंद है। इसमें छुपी खूबियों को पढऩे के बाद आप फिर कभी केले को एक ही नजरिए से नहीं देखेंगे। एक केला निरंतर ऊर्जा को बढ़ाता है। केले में तीन प्राकृतिक शुगर पाए जाते हैं- सूक्रोज, फ्रक्टोज और ग्लूकोज।

* कई रिसर्च में यह साबित हो चुका है कि सिर्फ दो केले का सेवन करने से आप 90 मिनट तक पर्याप्त ऊर्जावान रह सकते हैं। इस बात का पता इससे लगता है कि विश्व के प्रमुख खिलाडय़ों की डाइट में केला नंबर एक फल है।

* केले से हमें सिर्फ ऊर्जा ही नहीं मिलती, ये फिट रखने में हमें मदद करता है। कई बीमारियों से उबरने में केला काफी मददगार है। रोजाना इसका सेवन करना बहुत ही फायदेमंद होता है।

* तनाव में रहने वाले लोगों पर किए गए सर्वेक्षण में पाया गया कि केले का सेवन करने वालों ने इसके बाद काफी राहत महसूस की। ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि केले में ट्रिप्टोफान होता है। यह एक प्रकार का प्रोटीन है जो बॉडी को सेरोटोनिन में परिवर्तित कर देता है। सेरोटोनिन मानसिक तनावों से राहत देने, मूड में सुधार और खुश रखने के लिए जाना जाता है।

* विटामिन की गोलियों को भूल जाएं, क्योंकि केले खाने से विटामिन-बी6 की प्राप्ति होती है, जो ब्लड ग्लूकोज को नियंत्रण करने में सहायता करती है।

* यह एक ऐसा फल है, जिसमें पोटेशियम बहुत अधिक होता है और नमक कम, इसलिए यह ब्लडप्रेशर के लिए एकदम सही है। अमेरिकी फूड एंड औषधि प्रशासन द्वारा केले की क्षमता को देखते हुए ...

* कब्जरू केले में फाइबर की अधिकता के कारण यह कब्ज में लाभदायक माना जाता है। केले का शेक पेट को ठंडक पहुंचाता है। 

* यह ब्लड में शुगर के लेवल को भी नियंत्रित करता है।

* इंग्लैंड के ट्विकेनहैम स्कूल में 200 छात्रों ने ब्रेकफॉस्ट, ब्रेक और दोपहर के भोजन में केले को शामिल किया तो पाया गया कि उनका ब्रेन पॉवर पहले की अपेक्षा बढ़ा है। रिसर्च बताता है कि पोटेशियम से भरपूर इस फल को खाने से छात्र पढ़ाई में अधिक सर्तक दिखाई दिए।

* प्रेग्नेंसी में लाभकारीः प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को सबसे ज्यादा विटामिन व मिनरल्स की आवश्यकता होती है। प्रेग्नेंट महिलाओं को सलाह दी जाती है कि वे अपनी डाइट में केला अवश्य शामिल करें। यह बॉडी को ऊर्जा देता है और आसानी से पच भी जाता है।

* नशे में फायदेमंदः मिल्कसेक या शहद के साथ केले का सेवन करने से हैंगओवर से उबरने में सहायता मिलती है। केला मैग्नेशियम का अच्छा स्रोत है, इसलिए यह बहुत जल्दी पच जाता है और आपके मेटाबॉलिज्म को दुरुस्त रखता है।

* केले में नेचुरल एंटाएसिड पाया जाता है, इसलिए यदि आप ईष्र्या से ग्रस्त हैं तो केला खाने की कोशिश करें इससे आपकोराहत मिलेगी।

* मॉर्निग कमजोरीः कई लोगों को सुबह उठने पर थकान महसूस होती है या आलस आता है तो दोपहर के खाने में केले को शामिल करें। इससे ब्लड प्रेशर का स्तर सामान्य रहता है और सुबह के वक्त कमजोरी महसूस नहीं होती।

* नर्वसरू केले में विटामिन-बी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है जो नर्वस सिस्टम को सहायता प्रदान करता है। ऑस्ट्रिया में हुई एक रिसर्च में पाया गया कि काम के दौरान लोग चॉकलेट और चिप्स का सेवन करते रहते हैं, जिससे वे वजन बढऩे की समस्या से ग्रसित हो जाते हैं।

माहवारी (मासिक धर्म) के सभी दोषों को दूर करना.....!


* माताओं -बहनो को #मासिक धर्म (Periods) से सबन्धित समस्याएँ होना साधारण बात है अक्सर माहवारी की अनियमिता हो जाती है ,अर्थात कई बार रक्तस्त्राव बहुत अधिक हो जाता है और कई बार क्या होता है बिलकुल ही नहीं होता ! और कभी कभी ऐसा भी होता है की ये 2-3 दिन होना चाहिए लेकिन 1 ही दिन होता है ,और कई बार 15 दिन ही दुबारा आ जाता है ! और कई बार 2 महीने तक नहीं आता !

* मित्रो मासिक धर्म चक्र की अनियमिता की जितनी सभी समस्याएँ है इसकी हमारे आयुर्वेद मे बहुत ही अच्छी और लाभकारी ओषधि है वो है अशोक के पेड़ के पत्तों की चटनी !


* हाँ एक बात याद रखे आशोक का पेड़ दो तरह का है एक तो सीधा है बिलकुल लंबा ज़्यादातर लोग उसे ही अशोक समझते है जबकि वो नहीं है एक और होता है पूरा गोल होता है और फैला हुआ होता है वही असली अशोक का पेड़ है जिसकी छाया मे माता सीता ठहरी थी !

* तो आप इस असली अशोक के 5-6 पत्ते तोड़िए उसे पीस कर चटनी बनाओ अब इसे एक से डेढ़ गिलास पानी मे कुछ देर तक उबाले ! इतना उबाले की पानी आधा से पौन गिलास रह जाए ! फिर उसे बिलकुल ठंडा होने के लिए छोड़ दीजिये और फिर उसको बिना छाने हुए पीये ! सबसे अच्छा है सुबह खाली पेट पीना ! कितने दिन तक पीना ?? 30 दिन तक लगातार पीना उससे मासिक धर्म (periods ) से सबन्धित सभी तरह की बीमारियाँ ठीक हो जाती हैं ! ये सबसे अधिक अकेली बहुत ही लाभकारी दवा है ! जिसका नुकसान कोई नहीं है ! और अगर कुछ माताओ-बहनो को 30 दिन लेने से थोड़ा आराम ही मिलता है ज्यादा नहीं मिलता तो वो और अगले 30 दिन तक ले सकती है वैसे लगभग मात्र 30 दिन लेने से ही समस्या ठीक हो जाती है !

* ये तो हुई महवारी मे अनियमिता की बात ! अब बात करते पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द की. बहुत बार माताओ -बहनो को ऐसे समय मे बहुत अधिक शरीर मे अलग अलग जगह दर्द होता है कई बार कमड़,दर्द होना ,सिर दर्द होना ,पेट दर्द पीठ मे दर्द होना जंघों मे दर्द होना ,स्तनो मे दर्द,चक्कर आना ,नींद ना आना बेचैनी होना आदि तो ऐसे मे तेज pain killer लेने से बचे क्योंकि इनके बहुत अधिक side effects है , एक बीमारी ठीक करेंगे 10 साथ हो जाएगी और बहुत से pain killer तो विदेशो मे 20 वर्षो से ban है जो भारत मे बिकती है !

* तो आयुर्वेद मे भी इस तरह के दर्दों की तात्कालिक (instant relief ) दवाये है जिसका कोई side effect नहीं है ! तो पीरियडस के दौरान होने वाले दर्दों की सबसे अच्छी दवा है गाय का घी ,अर्थात देशी गाय का घी ! एक चम्मच देशी गाय का घी को एक गिलास गर्म पानी मे डालकर पीना ! पहले एक गिलास पानी खूब गर्म करना जैसे चाय के लिए गर्म करते है बिलकुल उबलता हुआ ! फिर उसमे एक चम्मच देशी गाय का घी डालना ,फिर ना मात्र सा ठंडा होने पर पीना ,चाय की तरह से बिलकुल घूट घूट करके पीना ! बिलकुल सिप सिप करके पीना है ! तात्कालिक (instant relief ) एक दम आराम आपको मिलेगा और ये लगातार 4 -5 दिन जितने दिन पीरियड्स रहते है पीना है उससे ज्यादा दिन नहीं पीना ! ये पीरियडस के दौरन होने वाले सब तरह के दर्दों के लिए instant relief देता है सामान्य रूप से होने वाले दर्दों के लिए अलग दवा है !

* एक बात जरूर याद रखे घी देशी गाय का ही होना चाहिए , विदेशी जर्सी,होलेस्टियन ,फिरिजियन भैंस का नहीं !! देशी गाय की पहचान है की उसकी पीठ गोल सा ,मोटा सा हम्प होता है !कोशिश करे घर के आस पास पता करे देशी गाय का ! उसका दूध लाकर खुद घी बना लीजिये ! बाजारो मे बिक रहे कंपनियो के घी पर भरोसा ना करें ! या भारत की सबसे बड़ी गौशाला जिसका नाम पथमेड़ा गौशाला है जो राजस्थान मे है यहाँ 2 लाख से ज्यादा देशी गाय है इनका घी खरीद लीजिये ये पूरा देशी गाय के दूध से ही बना है ! काफी बड़े शहरो मे उपलब्ध है !

*** अंत जब तक आपको जीवन मे आपको मासिक धर्म रहता है आप नियमित रूप से चूने का सेवन करें ... .!


गीला चूना  , जो पान वाले के पास से मिलता है कितना लेना है ....?

गेहूं के दाने जितना..... ! 

कैसे लेना है .....?

बढ़िया है की सुबह सुबह खाली पेट लेकर काम खत्म करे आधे से आधा गिलास पानी हल्का गर्म करे गेहूं के दाने के बराबर चूना  डाले चम्मच से हिलाये पी जाए.... ! 

इसके अतिरिक्त दही मे ,जूस मे से सकते है बस एक बात का ध्यान रखे कभी आपको पथरी की समस्या रही तो चूने  का सेवन ना करे..... ! 

ये चुना बहुत ही अच्छा है बहुत ही ज्यादा लाभकरी है मासिक धर्म मे होने वाली सब तरह की समस्याओ के लिए.... !

इसके अतिरिक्त आप जंक फूड खाने से बचे , नियमित सैर करे…

यौन शक्ति बढ़ाने के कुछ सरल घरेलू उपाय.....!




इस भाग दौड़ और तनाव भरी ज़िन्दगी तथा अनियमति और अनहेल्दी भोजन के कारण पुरुषों में कमजोरी की समस्या आजकल आम है। नपुंसकता, स्वप्नदोष, धातु दोष आदि ऐसी समस्याएं हैं जो वैवाहिक जीवन को बहुत अधिक प्रभावित करती हैं। असंयमित खान-पान या शरीर में पोषक तत्वों के कारण या अन्य गलत आदतों से पुरुषों को दुर्बलता या कमजोरी की परेशानी होने लगती है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं बेहद साधारण घरेलू नुस्खे जिनसे आप इस समस्या से बहुत जल्द छुटकारा पा सकते हैं।

आंवला:--


* 2 चम्मच आंवला के रस में एक छोटा चम्मच सूखे आंवले का चूर्ण तथा एक चम्मच शुद्ध शहद मिलाकर दिन में दो बार सेवन करना चाहिए। इसके इस्तेमाल से सेक्स शक्ति धीरे-धीरे बढ़ती चली जाएगी। इस प्रकार की परेशानी में आंवला बहुत फायदेमंद होता है। अत: प्रतिदिन रात्रि में गिलास में थोड़ा सा हुआ सुखा आंवले का चूर्ण लें और उसमें पानी भर दें। सुबह उठने के बाद इस पानी में हल्दी मिलाएं एवं छानकर पीएं। आंवले के चूर्ण में मिश्री पीसकर मिलाएं। इसके बाद प्रतिदिन रात को सोने से पहले करीब एक चम्मच इस मिश्रित चूर्ण का सेवन करें। इसके बाद थोड़ा सा पानी पीएं। जिन लोगों को अत्याधिक स्वप्नदोष होने की समस्या है, वे प्रतिदिन आंवले का मुरब्बा खाएं।

सेब:--


* एक सेब में जितनी हो सके उतनी लौंग लगा दीजिए। इसी तरह का एक अच्छा सा बड़े आकार का नींबू ले लीजिए। इसमें जितनी ज्यादा से ज्यादा हो सके, लौंग लगाकर दोनों फलों को एक सप्ताह तक किसी बर्तन में ढककर रख दीजिए। एक सप्ताह बाद दोनों फलों में से लौंग निकालकर अलग-अलग बोतल में भरकर रख लें। पहले दिन नींबू वाले दो लौंग को बारीक कूटकर बकरी के दूध के साथ सेवन करें। इस तरह से बदल-बदलकर 40दिनों तक 2-2 लौंग खाएं। यह एक तरह से सेक्स क्षमता को बढ़ाने वाला एक बहुत ही सरल उपाय है।

अश्वगंधा:--


* अश्वगंधा का चूर्ण, असगंध तथा बिदारीकंद को 100-100 ग्राम की मात्रा में लेकर बारीक चूर्ण बना लें। चूर्ण को आधा चम्मच मात्रा में दूध के साथ सुबह और शाम लेना चाहिए। यह मिश्रण वीर्य को ताकतवर बनाकर शीघ्रपतन की समस्या से छुटकारा दिलाता है।

सोंठ:--


* 4 ग्राम सोंठ, 4 ग्राम सेमल का गोंद, 2 ग्राम अकरकरा, 28 ग्राम पिप्पली तथा 30 ग्राम काले तिल को एकसाथ मिलाकर तथा कूटकर बारीक चूर्ण बना लें। रात को सोते समय आधा चम्मच चूर्ण लेकर ऊपर से एक गिलास गर्म दूध पी लें। यह रामबाण औषधि शरीर की कमजोरी को दूर करती है और सेक्स शक्ति को बढ़ाती है।

अजवायन:--


* 100 ग्राम अजवायन को सफेद प्याज के रस में भिगोकर सुखा लें। सूखने के बाद उसे फिर से प्याज के रस में गीला करके सुखा लें। इस तरह से तीन बार करें। उसके बाद इसे कूटकर किसी बोतल में भरकर रख लें। आधा चम्मच इस चूर्ण को एक चम्मच पिसी हुई मिश्री के साथ मिलाकर खा जाएं। फिर ऊपर से हल्का गर्म दूध पी लें। करीब-करीब एक महीने तक इस मिश्रण का उपयोग करें। इस दौरान संभोग बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। यह सेक्स क्षमता को बढ़ाने वाला सबसे अच्छा उपाय है

छुहारे:--


* चार-पांच छुहारे, दो-तीन काजू और दो बादाम को 300 ग्राम दूध में खूब अच्छी तरह से उबालकर तथा पकाकर दो चम्मच मिश्री मिलाकर रोजाना रात को सोते समय लेना चाहिए। इससे यौन इच्छा और काम करने की शक्ति बढ़ती है।

गाजर:--


* 1 किलो गाजर, चीनी 400 ग्राम, खोआ 250 ग्राम, दूध 500 ग्राम, कद्यूकस किया हुआ नारियल 10 ग्राम, किशमिश 10 ग्राम, काजू बारीक कटे हुए 10-15 पीस, एक चांदी का वर्क और 4चम्मच देशी घी ले लें। गाजर को कद्दूकस करके कडा़ही में डालकर पकाएं। पानी के सूख जाने पर इसमें दूध, खोआ और चीनी डाल दें तथा इसे चम्मच से चलाते रहें। जब यह सारा मिश्रण गाढ़ा होने को हो तो इसमें नारियल, किशमिश, बादाम और काजू डाल दें। जब यह गाढ़ा हो जाए तो थाली में देशी घी लगाकर हलवे को थाली पर निकालें और ऊपर से चांदी का वर्क लगा दें। इस हलवे को चार-चार चम्मच सुबह और शाम खाकर ऊपर से दूध पीना चाहिए। यह वीर्यशक्ति बढ़ाकर शरीर को मजबूत रखता है। इससे सेक्स शक्ति भी बढ़ती है।

इमली:--


* आधा किलो इमली के बीज लेकर उसके दो हिस्से कर दें। इन बीजों को तीन दिनों तक पानी में भिगोकर रख लें। इसके बाद छिलकों को उतारकर बाहर फेंक दें और सफेद बीजों को खरल में डालकर पीसें। फिर इसमें आधा किलो पिसी मिश्री मिलाकर कांच के खुले मुंह वाली एक चौड़ी बोतल में रख लें। आधा चम्मच सुबह और शाम के समय में दूध के साथ लें। इस तरह से यह उपाय वीर्य के जल्दी गिरने के रोग तथा संभोग करने की ताकत में बढ़ोतरी करता है।

कौंच का बीज:--


* 100 ग्राम कौंच के बीज और 100 ग्राम तालमखाना को कूट-पीसकर चूर्ण बना लें फिर इसमें 200 ग्राम मिश्री पीसकर मिला लें। हल्के गर्म दूध में आधा चम्मच चूर्ण मिलाकर रोजाना इसको पीना चाहिए। इसको पीने से वीर्य गाढ़ा हो जाता है और नामर्दी दूर होती है।

चोबचीनी:--


* 100 ग्राम तालमखाने के बीज, 100 ग्राम चोबचीनी, 100 ग्राम ढाक का गोंद, 100 ग्राम मोचरस तथा 250 ग्राम मिश्री को कूट-पीसकर चूर्ण बना लें। रोजाना सुबह के समय एक चम्मच चूर्ण में 4 चम्मच मलाई मिलाकर खाएं। यह मिश्रण यौन रुपी कमजोरी, नामर्दी तथा वीर्य का जल्दी गिरना जैसे रोग को खत्म कर देता है।

प्याज:--


* आधा चम्मच सफेद प्याज का रस, आधा चम्मच शहद और आधा चम्मच मिश्री के चूर्ण को मिलाकर सुबह और शाम सेवन करें। यह मिश्रण वीर्यपतन को दूर करने के लिए काफी उपयोगी रहता है।सफेद प्याज के रस को अदरक के रस के साथ मिलाकर शुद्ध शहद तथा देशी घी पांच-पांच ग्राम की मात्रा में लेकर एक साथ मिलाकर सुबह नियम से एक माह तक सेवन करें और लाभ देखें इससे यौन क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि देखी जाती है।

ढाक :--


* ढाक के 100 ग्राम गोंद को तवे पर भून लें। फिर 100 ग्राम तालमखानों को घी के साथ भूनें। उसके बाद दोनों को बारीक काटकर आधा चम्मच सुबह और शाम को दूध के साथ खाना खाने के दो-तीन घंटे पहले ही इसका सेवन करें। इसके कुछ ही दिनों के बाद वीर्य का पतलापन दूर होता है तथा सेक्स क्षमता में बहुत अधिक रुप से वृद्धि होती है।

जायफल :--


* 15 ग्राम जायफल, 20 ग्राम हिंगुल भस्म, 5 ग्राम अकरकरा और 10 ग्राम केसर को मिलाकर बारीक पीस लें। इसके बाद इसमें शहद मिलाकर इमामदस्ते में घोटें। उसके बाद चने के बराबर छोटी-छोटी गोलियां बना लें। रोजाना रात को सोने से 2 पहले 2 गोलियां गाढ़े दूध के साथ सेवन करें। इससे शिश्न (लिंग) का ढ़ीलापन दूर होता है तथा नामर्दी दूर हो जाती है।

इलायची :--


* इलायची के दानों का चूर्ण 2 ग्राम, जावित्री का चूर्ण 1 ग्राम, बादाम के 5 पीस और मिश्री 10 ग्राम ले लें। बादाम को रात के समय पानी में भिगोकर रख दें। सुबह के वक्त उसे पीसकर पेस्ट की तरह बना लें। फिर उसमें अन्य पदार्थ मिलाकर तथा दो चम्मच मक्खन मिलाकर विस्तार रुप से रोजाना सुबह के वक्त इसको सेवन करें। यह वीर्य को बढ़ाता है तथा शरीर में ताकत लाकर सेक्स शक्ति को बढ़ाता है।

तुलसी:--


* 15 ग्राम तुलसी के बीज और 30 ग्राम सफेद मुसली लेकर चूर्ण बनाएं, फिर उसमें 60 ग्राम मिश्री पीसकर मिला दें और शीशी में भरकर रख दें। 5 ग्राम की मात्रा में यह चूर्ण सुबह-शाम गाय के दूध के साथ सेवन करें इससे यौन दुर्बलता दूर होती है।

लहसुन:--


* 200 ग्राम लहसुन पीसकर उसमें 60 मिली शहद मिलाकर एक साफ-सुथरी शीशी में भरकर ढक्कन लगाएं और किसी भी अनाज में 31 दिन के लिए रख दें। 31 दिनों के बाद 10 ग्राम की मात्रा में 40 दिनों तक इसको लें। इससे यौन शक्ति बढ़ती है।

हल्दी :--


* वीर्य अधिक पतला होने पर 1 चम्मच शहद में एक चम्मच हल्दी पाउडर मिलाकर रोजाना सुबह के समय खाली पेट सेवन करना चाहिए। इसका विस्तृत रुप से इस्तेमाल करने से संभोग करने की शक्ति बढ़ जाती है।

उड़द की दाल :--


* आधा चम्मच उड़द की दाल और कौंच की दो-तीन कोमल कली को बारीक पीसकर सुबह तथा शाम को लेना चाहिए। यह उपाय काफी फायदेमंद है। इस नुस्खे को रोजाना लेने से सेक्स करने की ताकत बढ़ जाती है।

शंखपुष्पी :--


* शंखपुष्पी 100 ग्राम, ब्राह्नी 100 ग्राम, असंगध 50 ग्राम, तज 50 ग्राम, मुलहठी 50 ग्राम, शतावर 50 ग्राम, विधारा 50 ग्राम तथा शक्कर 450 ग्राम को बारीक कूट-पीसकर चूर्ण बनाकर एक-एक चम्मच की मात्रा में सुबह और शाम को लेना चाहिए। इस चूर्ण को तीन महीनों तक रोजाना सेवन करने से नाईट-फाल (स्वप्न दोष), वीर्य की कमजोरी तथा नामर्दी आदि रोग समाप्त होकर सेक्स शक्ति में ताकत आती है।

उंटगन के बीज :--


* 6 ग्राम उंटगन के बीज, 6 ग्राम तालमखाना तथा 6 ग्राम गोखरू को समान मात्रा में लेकर आधा लीटर दूध में मिलाकर पकाएं। यह मिश्रण लगभग आधा रह जाने पर इसे उतारकर ठंडा हो जाने दें। इसे रोजाना 21 दिनों तक समय अनुसार लेते रहें। इससे नपुंसकता (नामर्दी) रोग दूर हो जाता है।

गोखरू :--


* सूखा आंवला, गोखरू, कौंच के बीज, सफेद मूसली और गुडुची सत्व- इन पांचो पदार्थों को समान मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें। एक चम्मच देशी घी और एक चम्मच मिश्री में एक चम्मच चूर्ण मिलाकर रात को सोते समय इस मिश्रण को लें। इसके बाद एक गिलास गर्म दूध पी लें। इस चूर्ण से सेक्स कार्य में अत्यंत शक्ति आती है।

बरगद :--


* सूर्यास्त से पहले बरगद के पेड़ से उसके पत्ते तोड़कर उसमें से निकलने वाले दूध की 10-15 बूंदें बताशे पर रखकर खाएं। इसके प्रयोग से आपका वीर्य भी बनेगा और सेक्स शक्ति भी अधिक हो जाएगी।

पीपल :--


* पीपल का फल और पीपल की कोमल जड़ को बराबर मात्रा में लेकर चटनी बना लें। इस 2 चम्मच चटनी को 100 मि.ली. दूध तथा 400 मि.ली. पानी में मिलाकर उसे लगभग चौथाई भाग होने तक पकाएं। फिर उसे छानकर आधा कप सुबह और शाम को पी लें। इसके इस्तेमाल करने से वीर्य में तथा सेक्स करने की ताकत में वृद्धि होती है।

त्रिफला :--


* एक चम्मच त्रिफला के चूर्ण को रात को सोते समय 5 मुनक्कों के साथ लेना चाहिए तथा ऊपर से ठंडा पानी पिएं। यह चूर्ण पेट के सभी प्रकार के रोग, स्वप्नदोष तथा वीर्य का शीघ्र गिरना आदि रोगों को दूर करके शरीर को मजबूती प्रदान करता है।

सफेद मूसली :--


* सालम मिश्री, तालमखाना, सफेद मूसली, कौंच के बीज, गोखरू तथा ईसबगोल- इन सबको समान मात्रा में मिलाकर बारीक चूर्ण बना लें। इस एक चम्मच चूर्ण में मिश्री मिलाकर सुबह-शाम दूध के साथ पीना चाहिए। यह वीर्य को ताकतवर बनाता है तथा सेक्स शक्ति में अधिकता लाता है।