प्रश्नों के उत्तर - 3


Courtsey :-
Hirendra Pratap Singh

रवि कटनी जो खुद को शास्त्र का महाज्ञाता समझ अपने इन दकियानूसी ज्ञान के आधार पर परम पूज्य सदगुरुदेव पर प्रश्न कर रहा है तो इसके सभी प्रश्न के उत्तर हैं मेरे पास...और ये जो साधना Copy/Paste की बात कर रहा है तो मैंने इसकी website में इसका डाला हुवा सभी साधनाएँ जो इसने पूर्णतः Copy/Paste किया है इसको में अगली post में सप्रमाण रख रहा हूँ...source सहित...
बस कुछ दिन पुनः research कर article लिख रहा हूँ ताकि...

इसका पहला प्रश्न की सदगुरुदेव निखिल के गुरु का कोही चित्र क्यों नहीं है??
अरे मुर्ख!! योगीराज सच्चिदानंद स्थुल दृष्टि से सर्वाथा परे है....और येही और ऐसा ही प्रश्न एक बार विशुद्धानंद को भी पुचा गया था की “आप को अपने गुरु भृगुराज महातपा की explanation दे रहे हैं और कहे रहे की इनकी उम्र ७०० से अधिक है...क्या प्रमाण है??”
उत्तर था:- जिस गुरु की प्रश्न पुछ रहे हो और देहगत तस्वीर ढूंड रहे हो ऐसे तो “श्री श्री महातपा” आपको 10000 साल भी नहीं मिलेंगे..
खैर!!

अब दूसरा प्रश्न की सदगुरुदेव निखिल किस पंथ के हैं???
वैसे तो सदगुरुदेव ने लगभग बहुताय पंथ की अनुसरण कर साधनाएँ की है और अगर किसी को प्रमाण चाहिए तो वो नेपाल के गोरखा जिल्ला (जिस स्थल को गोरखनाथ का उत्पत्ति स्थलकहा जाता है) और नेपाल के ही भेरी अंचल में जा कर नाथ सम्प्रदाय के जोगियों (जिनके कान का कुछ हिस्सा कटा हुवा होता है) से पता कर ले की स्वामी निखिलेश्वरानंद के बारे में उनके क्या मत हैं??
उत्तर खुद मिल जायेगा...
अब इनको ये लगा होगा के एक व्यक्ति इतनी सम्प्रदाय में कैसे लग सकता है??
तो इसका जवाब इसे खुद ढूंडना पडेगा...क्योंकि अगर कोही अघोरी से मिले तो उसके अनुसरण कर के ही औघड़ साधनाएँ की जा सकती हैं....कॉल के कॉल...बाम के बाम...शाक्त के शाक्त...गणपत के गणपत...etc
अब आते हैं पंथ की बात पर...
अगर शास्त्र महारथ कटनी को ज्ञात हो तो हमारे ऋषियों ने केवल ४ ही सम्प्रदाय को मान्यता दिया है [(ऋ.१०/९०/१२) (अ.वे १९/६/६) (वा.य ३१/११) (तै. आ. 3/१२/5 )]....और यह कहना श्री प्रपन्नाचार्यका है...(जिनका भी विविरण में आघे दे रहा हूँ...
फिर भी आगे चल सब की विभिन्न मतों के कारण व्यक्ति विभिन्न सम्प्रदाय में विभाजित होते गए और आज की data अनुसार कुल सम्प्रदाय १३६ हैं...और कटानी केवल...शाक्त शैव गणपत कॉल नाथ.... शाक्त शैव गणपत कॉल नाथ.... रटे जा रहा है 
अब जिसे खुद १० से ज्यादा सम्प्रदाय का ज्ञान ना हो वोही मुर्ख स्वयं प्रश्न करने चला है...
अब ये १३६ सम्प्रदाय का उल्लेख detail में कहा मिलेगा ये प्रश्न आया होगा तुम्हारे मन में तो उत्तर है “एक सौ छत्तीस सम्प्रदाय” नामक पुस्तक पढो तुम...
और इस पुस्तक में भी १२९ और १३० number की सम्प्रदाय के बारे में उतनी detail नहीं है जसकी अगर detail चाहिए तो “चतुर्वर्ण्य भारत समीक्षा” नामक ग्रन्थ की पृष्ठ १९३-२०० देखलो..ले.म.म. महेश्वरानंद गिरी सुरतगीरी बंगला हरिद्वार कंखल
और यह कुछ अन्य detail का भी उल्लेख नहीं है जैसे भी बुद्ध के समय में और आठ सम्प्रदाय प्रचलित थे जिनका वर्णन पूर्णतः त्रिपिटक में उल्लेख है...
अब त्रिपिटक अगर समझना हो तो तुम तिब्बती या पाली भासा की ट्रेनिंग ले लो...
इतना हुवा सम्प्रदाय के बारे में अब सदगुरुदेव के सम्प्रदाय के बारे में...
अगर तुम्हे सम्प्रदाय का अच्छा ज्ञान हो तो ज्ञात होगा ही की, अन्य सम्प्रदाय की तरह संन्यास सम्प्रदाय भी 3 भागों में विभक्त हुवा है...(और इसका कुछ अंश भी तुम्हे उपरोक्त पुस्तक में मिल जाएगा..)
i)मूल सन्यासी 
ii) दंडी सन्यासी 
iii) दशनामी सन्यासी 
अब यहाँ ये जानना आवश्यक है की i) और ii) की पुनः विभाजन नहीं हुवा है..
और iii) को १० भागो में विभक्त किया गया है..यथा 1) गिरी 2) पूरी 3) भारती ४) सरस्वती 5)वन ६)अरण्य 7)सागर ८)पर्वत 9)तीर्थ १०)यति 
कभी पढ़ा होगा श्री अरूण कुमार शर्मा की पुस्तक में पूर्णानंद सरस्वती के बारे मैं .....वो सन्यासी साधक संन्यास सम्प्रदाय के दश्नामी सन्यासी के साखा अंतर्गत सरस्वती मत का अनुसरण करते थे...
दुसरे प्रसिद्ध सन्यासी हैं श्री रामतीर्थ जी परमहंस...ये संन्यास सम्प्रदाय के दश्नामी सन्यासी के साखा अंतर्गत तीर्थ मत का अनुसरण करते थे...
इसी तरह सदगुरुदेव निखिल संन्यास सम्प्रदाय के मूल सन्यासी थे...अब भी कोही प्रश्न रह गया हो तो पुच लो....या फिर रटते रहो “शाक्त शैव गणपत कॉल .... शाक्त शैव गणपत नाथ....”
अब बात आता है वो गृहस्त क्यों लौटे...संन्यास लेने के बाद तो...
खैर!! तुम जैसो की यही सोच ने आज भारत को पीछे ढकाल दिया...और ये सब विद्याएँ जन साधारण से विमुख हो गयी...
तुमने साधक होने का मतलब पलायनवाद से जोड़ लिया.....
“नारी मूई घर संपत्ति नासी...”
सदगुरुदेव सदैव पलायनवाद के विरोधी थे...उन्होंने सदा यही मत समझ में रखा की साधना में गृहस्त का उतना ही अधिकार है जितना की खुद को 1 सम्प्रदाय के निर्दिष्ट कहने वालो का....
और जब ये कार्य हुवा तो खुजली होना अति स्वाभाविक था....क्योंकि इनका पञ्चमकार को सदगुरुदेव प्रश्न लगा, गृहस्थ को ही साधना करवा रहे थे(बिना पंचमकार) और इनका व्यापार ठप्प...और अभी भी 2/४ को तो हो ही रहा है...
सदगुरुदेव ने कभी पंचमकार का निंदा नहीं किया केवल यही कहा की गृहस्त को ये आवश्यक नहीं है....गृहस्थ सात्विक साधना करो...उन्नति इसी से होगी...और बहुतायों का हुवा भी..
सदगुरुदेव ने अपने शिष्यों को केवल पूर्णता देने की कोशिश की...और यहाँ एक और बार खुजली हुवा अन्यों को....की “अरे भाई!! हम शाक्त/शैव/नाथ/गणपत/कॉल/बाम है पर अब तो हम से डरने छोड़ दिए हैं सब....अब क्या करें??”
क्योंकि जहां ये षट्कर्म के टुच्चे प्रयोग करते थे सदगुरुदेव निखिल के शिष्य तीव्रतम महाविद्या और भैरव, प्रत्यंगिरा और महाविपरित प्रत्यंगिरा साधना करते थे....क्रोध और कंकाल भैरव साधना करते थे...
सदगुरुदेव अपने शिष्यों को सदा पूर्णता की पाठ पढ़ाते थे....षट्कर्म और बुखार और jaundice उतारना तांत्रिक प्रयोग है पर वो पूर्णता नहीं है..सदगुरुदेव अपने शिष्यों को सदैव इनसब से ऊपर उठने की बात सिखाते थे और जो ऊपर उठने की क्षमता नहीं रखते थे वो तुरंत शत्रु बन जाते थे...
खैर!! ये तो त्रेता और द्वापर युग से ही चला आ रहा है....फिर अभी तो कलि युग है...

अब बात करते हैं के साधना का नाम दूसरा है...
तो इसके बारे में मुझसे बेहतर तुम “शास्त्र महारथ व्याख्यान वाचस्पति डॉ. स्वामी रामकृष्णप्रपन्नाचार्य वेदान्ताचार्य (पीएच. डी)” से पुछ तो...जिस सम्मोहन साधना और अघोर गौरी साधना की उल्लेख किया है इसने इसकी जानकारी इसे मिल जायेगी की कैसे मतानुसार एक ही साधनाओ को विभिन्न नाम दिया जाता है और इतना ही नहीं....उनसे जाकर पुच ले की डॉ. श्रीमाली के बारे में कृपा कर बताये...तब पता चलेग....यहाँ में श्री प्रपन्नाचार्य लिखित एक article भी रख रहा हूँ...अभी इनकी उम्र ~89 yrs है... 
अब इसके मन में प्रश्न आया होगा की कौन है प्रपन्नाचार्य??
तो प्रपन्नाचार्य के बारे में :- 
दार्शनिक प्रवर श्री पं. वेदानन्द झा (भू. प्राचार्य श्री मोतीनाथ संस्कृत महाविद्यालय )
इतिहास मर्मज्ञ आंशुकवि श्री योगी नरहरीनाथ शास्त्री
महोपाध्याय विद्वद्वर्य पं. शेषराज शर्मा रेग्मी (भू. नेपाली विभाग, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, भू.पू. त्रि.वि. नेपाल )
विद्वच्छिरोमणि धर्मगुरु श्रीनीलकंठ शास्त्री
श्री पं. जगन्नाथ शर्मा कंडेल नेपाली विभागाध्यक्ष, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी
श्री डिल्लीराम तिमसिना, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, भू.पू.
ये सभी ने खुले हृदय से ये बात स्वीकार किया है की श्रीप्रपन्नाचार्य जो कहते हैं वो सदा सत्य की कसौटी पर शत-प्रतिशत खरी उतरती ही है...मेरी लेखनी की सत्यता खुद परख ले..
.
अब बात करते हैं के क्या कोही संत सदगुरुदेव के बारे में या support में था??

तो इसका उत्तर है बिलकुल...पर जो ज्ञानी थे जो साधक थे वह....ज़रा नाम तो बताओ??
तो ये लो..
#) स्वामी प्रपन्नाचार्य
#) महाशम्शानेश्वर चंडी, (जिनको शंका हो वोह चंडी आश्रम, टोखा, काठमांडू) में संपर्क करें और इनके सामने सदगुरुदेव को मात्र 1 बार गाली दे....ये विनती है मेरी...पर इनके सामने!! फिर पता लगे की कौन हैं निखिल
#) डॉ. खिलनाथ वस्ताकोती, (ज्योतिषाचार्य; पिएच. डी)
#) धर्मंगुरु व्यसाचार्य, (किशोर गौतम), व्यास आश्रम काठमांडू 
#) डॉ. चिंतामणि योगी (प्रमुख – हिन्दू विद्यापीठ – शांति सेवा आश्रम – नेपाल)....और ये साधक खेचरी मुद्रा में प्रवीण हैं....संपर्क कर सत्यता परख लें..
#) तंत्रऋषि स्वामी श्री वेदचैतन्य शाश्वत पल्लव वज्राधिपति, ओमकार आश्रम
इन में से कुछ सदगुरुदेव के शिष्य हैं तो कुछ व्यक्तिगत रूप से जानते हैं सदगुरुदेव को....


अब बात आता है की ये कटानी क्यों इतना पागल हुवा अचानक??

सदगुरुदेव सदैव प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रूप से कहते थे तंत्र साधना के साथ ही साथ योग साधना आवश्यक ही नहीं अति अनिवार्य है..वरना साधक अर्ध या पूर्ण विक्षिप्त हो जाता है...
और कटानी प्रमाण है इसका...
इसी लिए हर शिविर में प्रातः योग करवाया जाता था और इतना ही नहीं सदगुरुदेव ने सांकेतिक रूप में भी इस बात को हमेशा स्पष्ट किया..(सभी ने शिविर के वक़्त पंडाल में “शक्ति-चक्र” notice अवश्य किया होगा....1/2 नहीं जगह जगह होती थी....ऐसा इसी लिए क्योंकि सदगुरुदेव प्रत्यक्ष रूप से तोह कहते ही थे....पर अप्रतक्ष रूप से भी अपने शिष्यों को ज्ञान देते थे...के तंत्र साधना के साथ योग साधना अनिवार्य है..
ऐसा क्यों??
क्योंकि योग से ही उर्ध्वगामी शक्ति को विस्तारित किया जा सकता है...और जो केवल शराब और मांस भक्षण कर साधना रत रहे...उसमे कुछ क्षमता तो आ सकती है मंत्र बल से पर यही बल साधक आगे विक्षिप्त अवश्य करदेती है...
1 जगह मैंने पढ़ा जहां कटानी ने कहा के सदगुरुदेव के बाल क्यों नहीं है??? [इसका ज्ञान यहाँ समाप्त हवी थी इसी लिए कुतर्क पे उतरा ये ]तो मेरा प्रश्न है की इसके website पर सुन्दरता वाली साधना है तो फिर ये इतना डरावना ????
खैर!!

कहीं 1 जगह पढ़ा के सदगुरुदेव के महानता का प्रमाण??
तोह में सदगुरुदेव की और नेपाल के भू.पू. महाराजाधिराज श्री वीरेंद्र वीर विक्रम शाह देव की साथ में बैठी हवी photo भी लगा रहा हूँ...
ये खुद को इतना क्षमतावान समझता हो तोह खुद का भी 1 photo रख के दिखादे मनमोहन सिंह के साथ???
कहीं whitehouse के सामने खडा हुवा photo ना लगादे स्टूडियो जाकर 
सभी भाइयों से निवेदन के इस फ़ालतू और दकियानूस इंसान के कुछ भी तर्क ना करें...क्योंकी तर्क उसी से किया जाता है जो ज्ञानवान हो....ये कुतर्की; पूर्णतः भ्रमित और कुंठित है...
इसे जो बोलना है बोलने दें...
और सदगुरुदेव की बदनामी क्यों??
इसका कारण है अरे भाई जिनका नाम हो उन्हें ही तो लोग बदनाम करने के असफल कोशिश करते हैं...अब रवि कटानी को कौन बदनाम करे??
इसी लिए सभी गुरु भाइयों से निवेदन है...की इस मुर्ख को अपने ही हाल पे छोड़ दें...
ये वो पानी है जो गिरने से पहले उबलता है...कुछ देर उबलने दो जब जमीन पर पड़ेगा और जब होस आएगा...तब बहुत देर हो चुकी होगी...सभी केवल देखते जाएँ....और इस मुर्ख की मुर्खता का आनंद लें!!
बाकी कुछ शेष रह गया है...वोह अगली post में....
जय गुरुदेव!!
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Girlfriend Vashikaran


This is a good remedy for girl friend vashikaran and very easy also, if your problem is not so critical and you have only minor problems in your love life or your lover not caring about you so you can use this remedy to get your love back. For Female/Girl friend vashikaran mantra prayog you need hairs of your girl friend and dust of her shoes. Take it when you have time and keep it safe somewhere at home. Ask to any pandit for guru pushya nakchatra and time also. At exact time take dust and hairs and go near any river or pond. seat over red mat and face pond side take hairs and dust in your hand and recite this mantra and each time leave your breath over that items slowly. Like this you will recite this mantra total 501 times and after that burn that hairs and keep that ash mix it into dust and sprinkle it over girl friend head and body as soon as possible. Within some days she will come in your favor and not fight with you again for small issues like before.
This is very strong and powerful vashikaran mantra and remedy for girl friend and female vashikaran, if you are doing this with innocent nature and you have nothing bad in your mind your purpose is good and you have true love in heart and doing this procedure with full devotion so you will get success soon.
Mantra- Aum Shankini Yakshini Bhogpradaye Sukhdevi Shankh Dharini Jay Jay Maa Lover Name Vashyam Vashyam Kuru Kuru Mahadevi Namattashayi Namattashayi Namoh Namah.

Kali vashikaran sadhna


Kali vashikaran sadhna is one of the most powerful vashikaran and before using it we want to mention here something for our readers please read it carefully. Today vashikaran mantra very easily available in website, blogs and also in many books related to tantra mantra but without a guru you cannot get success. You think like, you can get mantra from anywhere and you will recite and get success but everything is your confusion only. You are not aware about tantra procedure. We highly recommend people to make a guru or take guidance from guru before using any vashikaran mantra, also for most powerful vashikaran you need horoscope analysis, face reading and present situations and also about your mahadasha and antardasha. If you follow procedure and you use most powerful vashikaran so you can get success easily and also you can fulfill your desires, but if you think, you will recite any mantra without proper guidance and procedure you are only wasting your time, nothing else.
We are giving here one most powerful vashikaran for people and also we request to use only when you have a guru, without guru do not try to use it.
You can start this ritual from any auspicious day, it is better if you can start this ritual after 10 P.M. Take bath, wear yellow cloth and seat on yellow mat and face north or east direction, first do worship for your guru by mantra and devotion and after that place energized kaamdev yantra in front of you and do panchopchaar poojan for it. Light a oil lamp in front of you and show it to yantra and after this procedure do Karanyaas
Karanyaas Mantra
KLAAM ANGUSHTHAABHYAAM NAMAH
KLEEM TARJANIBHYAAM NAMAH
KLOOM SARVANANDMAYI MADHYMABHYAAM NAMAH
KLAIM ANAAMIKAABHYAAM NAMAH
KLAUM KANISHTKABHYAAM NAMAH
KLAH KARTAL KARPRISHTHAABHYAAM NAMAH
HRIDYAADI NYAAS
KLAAM HRIDYAAY NAMAH
KLEEM SHIRSE SWAHA
KLOOM SHIKHAYAI VASHAT
KLAIM KAVACHHAAY HUM
KLAUM NAITRTRYAAY VAUSHAT
KLAH ASTRAAY PHAT
After karanyaas chant this mantra 11 rosary and when you are chanting, try to concentrate your mind on the flame of lamp, you can use crystal or sphatik rosary only for this jap, other rosary not allowed.
Mantra- Aum Kleem Madmad Maaday Maaday Lover Name Vashya Vashya Vashya Hreem Swaha
You should do this ritual till 11 days, If within 11 days favorable result comes so you can do it again for 51 days for permanent result. If this procedure not working for you and you are not getting result so finally you got your answer, means desired person not in your luck, you need some professional help for vashikaran so you can contact your vashikaran specialist for vashikaran prayog or for Strong Love Spells. This procedure is really most powerful vashikaran and it gives result if you follow procedures and you have full faith and trust in god.

Tilak Vashikaran


Procedure- Mix Kumkum, Keshar, Gorochan And Chandan And Karpoor in Cow Milk And Make Paste And Than Take That Paste In Finger And Recite This Mantra 108 Times And Make a Tilak From That Paste on Your Forehead. From This Procedure Everyone Will Come Under Control When They Will Come In Front Of You.
मंत्र
उच्छिष्टेच्छिष्टा चांडालि सती वाकं फुरो मंत्रय स्वाहा