प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रहमचारणी
त्रतीयं चंद्रघंटेति कुष्मांनडेति चतुर्थकम
पंचमं स्कन्दमातेती षष्ठम कात्यायनीति च
सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम
नवमं सिद्धि दात्री च नवदुर्गाः प्रकीर्तिताः
त्रतीयं चंद्रघंटेति कुष्मांनडेति चतुर्थकम
पंचमं स्कन्दमातेती षष्ठम कात्यायनीति च
सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम
नवमं सिद्धि दात्री च नवदुर्गाः प्रकीर्तिताः
शैलपुत्री- सम्पूर्ण जड़ पदार्थ भगवती का पहिला स्वरूप हैं पत्थर मिटटी जल वायु अग्नि आकाश सब शैल पुत्री का प्रथम रूप हैं. इस पूजन का अर्थ है प्रत्येक जड़ पदार्थ में परमात्मा को महसूस करना.
ब्रह्मचारिणी- जड़ में ज्ञान का प्रस्फुरण, चेतना का संचार भगवती के दूसरे रूप का प्रादुर्भाव है. जड़ चेतन का संयोग है. प्रत्येक अंकुरण में इसे देख सकते हैं.
चंद्रघंटा-भगवतीका तीसरा रूप है यहाँ जीव में वाणी प्रकट होती है जिसकी अंतिम परिणिति मनुष्य में बैखरी (वाणी) है.
कुष्मांडा- अर्थात अंडे को धारण करने वाली; स्त्री ओर पुरुष की गर्भधारण, गर्भाधान शक्ति है जो भगवती की ही शक्ति है, जिसे समस्त प्राणीमात्र में देखा जा सकता है.
स्कन्दमाता- पुत्रवती माता-पिता का स्वरूप है अथवा प्रत्येक पुत्रवान माता-पिता स्कन्द माता के रूप हैं.
कात्यायनी-के रूप में वही भगवती कन्या की माता-पिता हैं. यह देवी का छटा स्वरुप है.
कालरात्रि- देवी भगवती का सातवां रूप है जिससे सब जड़ चेतन मृत्यु को प्राप्त होते हैं ओर मृत्यु के समय सब प्राणियों को इस स्वरूप का अनुभव होता है.
भगवती के इन सात स्वरूपों के दर्शन सबको प्रत्यक्ष सुलभ होते हैं परन्तु आठवां ओर नौवां स्वरूप सुलभ नहीं है. महागौरी का आठवां स्वरूप गौर वर्ण है.यह ज्ञान अथवा बोध का प्रतीक है, जिसे जन्म जन्मांतर की साधना से पाया जा सकता है. इसे प्राप्त कर साधक परम सिद्ध हो जाता है. इसलिए इसे सिद्धिदात्री कहा है.
नवरात्री में माँ की उपासना करने से जीवन के सभी दुःख, कष्ट, संकट दूर होते है। ये हम सभी को ज्ञात है परन्तु साधारण व्यक्ति जो साधना और उपासना में समय नहीं दे पाते वे लोग कैसे जीवन की संकटो से मुक्ति पाएंगे? सबके कष्ट अलग है जैसे
शादी न होना
नौकरी न मिलना
पति से झगडे
हमेशा बीमार रहना
आर्थिक परेशानिया
प्रेम प्रकरण Love matter
Study Related problems
दुर्भाग्य
शादी न होना
नौकरी न मिलना
पति से झगडे
हमेशा बीमार रहना
आर्थिक परेशानिया
प्रेम प्रकरण Love matter
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दुर्भाग्य
और ना जाने क्या क्या। इन सबके लिए इस नवरात्री को हमारे पास एक दिव्य उपहार है हमारे पाठको के लिए एक उपहार है। जिससे वे इन सबसे हमेशा के लिए छुटकारा पायेंगे।
9 दिनों के अखंडित मंत्र जाप, सप्तशती, प्रचंड हवन से प्राण प्रतिष्ठित की हुई माला जो प्रत्येक व्यक्ति के दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदलनेमे सक्षम है। प्रत्येक दुःख को सुख में बदल देगी। ये हम लिखकर देते है।
अगर अपने भाग्य को बदलना चाहते हो तो हमें
अपना नाम,
माता का नाम,
जन्म दिनांक,
जन्म स्थल,
जन्म समय,
अपना पता और फोन नंबर हमें 22 सितम्बर से पहले mail करे। जिससे हम आपके नाम से माला सिद्ध कर सके। अधिक जानकारी के लिए हमें संपर्क करे।
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email : divinelifesol@gmail.com
श्री पं. अभ्यंकर गुरूजी के आदेश से
S.B.
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1 टिप्पणी:
guruji please give me that rosary i need it
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pranam.
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